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टूटी- बिखरी झारखंड कांग्रेस को किसान आंदोलन के रूप में मिली संजीवनी! कैसे, पढ़ें News-18 एक्सक्लूसीव

गोड्डा से देवघर, फिर रांची के खिजरी में किसान रैली और अब हजारीबाग में टैक्टर रैली कांग्रेस के राजनीतिक स्वार्थ को दर्शाने के लिये काफी है.

गोड्डा से देवघर, फिर रांची के खिजरी में किसान रैली और अब हजारीबाग में टैक्टर रैली कांग्रेस के राजनीतिक स्वार्थ को दर्शाने के लिये काफी है.

झारखंड में अबतक किसानों (Farmers) के नाम पर कांग्रेस (Jharkhand Congress) की तीन रैलियां हो चुकी हैं, जिसमें किसानों की भागीदारी का उलझन खुद कांग्रेस के नेता भी नहीं सुलझा पा रहे हैं.

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रांची. दिल्ली में किसान आंदोलन (Farmer Agitation) और झारखंड में कांग्रेस (Jharkhand Congress) को जीवनदान, ऐसा ही कुछ झारखंड की राजनीति में देखने को मिल रहा है. कृषि कानून के खिलाफ किसानों के आंदोलन से खुद किसानों का कितना भला हो पायेगा, ये तो आने वाला वक्त तय करेगा, पर इस आंदोलन के नाम पर झारखंड जैसे प्रदेश में कांग्रेस जैसे दल खुद को जीवित करने में जुट गए हैं.

राज्य में अब तक किसानों के नाम पर कांग्रेस की तीन रैलियां हो चुकी हैं, जिसमें किसानों की भागीदारी का उलझन खुद कांग्रेस के नेता भी नहीं सुलझा पा रहे हैं. गोड्डा से देवघर तक ट्रैक्टर रैली, फिर रांची के खिजरी विधानसभा क्षेत्र में किसान रैली और अब हजारीबाग में कांग्रेस की ट्रैक्टर रैली का संदेश कांग्रेस के राजनीतिक स्वार्थ को दर्शाने के लिये काफी है.

किसानों की कर्जमाफी का वादा और हकीकत

किसान आंदोलन के नाम पर कांग्रेस की ये राजनीतिक छटपटाहट उस वक्त देखने को मिल रही है, जब किसानों की ऋणमाफी पर वो खुद अपने वायदे पर खरा नहीं उतर पाई है. झारखंड में किसानों को दो लाख रुपया तक ऋणमाफी का वादा करने वाली कांग्रेस का हाल कुछ ऐसा है कि अब 50 हजार रुपया की ऋण पर उसके पसीने छुट रहे हैं. ये हाल तब है जब हेमंत सोरेन सरकार में कृषि विभाग कांग्रेस के पास है.

बिखरे हुए संगठन को समेटने की रणनीति

संगठन के मोर्चे पर कांग्रेस का बुरा हाल है. प्रदेश से लेकर प्रखंड स्तर तक कांग्रेस का संगठन पूरी तरह से बिखरा हुआ है. अलग – अलग खेमों में बंटी कांग्रेस के लिये हर एक बड़े नेता को एक मंच पर लाना सबसे बड़ी चुनौती है. यही वजह है कि कांग्रेस ने कृषि कानून के खिलाफ और किसानों के समर्थन के नाम पर आंदोलन की रणनीति बनाई है. हालांकि कांग्रेस के लिये ये इतना आसान नहीं, जितना वो समझ रही है.

ट्रैक्टर रैली के नाम पर शक्ति प्रदर्शन
कांग्रेस के नेता- विधायक इस वक्त ट्रैक्टर रैली या किसान रैली के नाम पर शक्ति प्रदर्शन करने में जुटे हैं. गोड्डा में प्रदीप यादव से लेकर देवघर में बादल पत्रलेख तक, खिजरी में राजेश कच्छप से लेकर हजारीबाग में अंबा प्रसाद के समर्थन में आने वाली भीड़ को इस रूप में देखा जा सकता है. वैसे कांग्रेस की इस रणनीति का बहुत ज्यादा फायदा होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है. तैयारी और दावों के अनुरूप कांग्रेस की रैली में भीड़ नहीं जुट पा रही है.

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