केरल की तर्ज पर झारखंड में भी सब्जियों की MSP तय करने की मांग, सरकार ने बनाई हाई लेवल कमिटी

झारखंड के किसान सब्जी का उचित दाम नहीं मिलने से परेशान हैं.

झारखंड के किसान सब्जी का उचित दाम नहीं मिलने से परेशान हैं.

MSP for Vegetables: कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने भरोसा दिलाया है कि राज्य में सब्जियों का msp तय करने के लिए हाई लेबल कमिटी बनाई गई है. रिपोर्ट आने के बाद सरकार इस दिशा में फैसला लेगी.

  • Share this:
रांची. झारखंड की राजधानी रांची और आसपास का इलाका सब्जी उत्पादन के लिए जाना जाता है. गोभी, बंदगोभी, बैगन से लेकर हर तरह की सब्जियां (Vegetables) यहां के किसान उगाते हैं. पर इन दिनों ये किसान परेशान हैं, क्योंकि इनके सब्जियों का दाम बाजार में नहीं मिल रहा. पूंजी निकालना भी मुश्किल हो रहा है. भीषण गर्मी में दिनभर खेतों में लगे रहने वाले किसानों ने अब राज्य सरकार से केरल की तर्ज पर सब्जियों का एमएसपी (MSP) यानि न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की मांग की है.

रांची के होचर गांव के युवा किसान मो आरिफ जैसा दर्द ही राज्य भर के उन किसानों का है जो सब्जियों की खेती करते हैं. इन सब्जी उत्पादक किसानों को अपनी लागत तक निकालना मुश्किल हो रहा है. बैगन की खेती करने वाले आरिफ को इस बार काफी नुकसान उठाना पड़ा है. बेमौसम बारिश से जहां पहले फसल को नुकसान पहुंचा, वहीं बाजार में सब्जियों के भाव न होने से उनकी कमर ही टूट गयी. आरिफ पढ़े लिखे किसान हैं, इसलिए इन्होंने सरकार से सब्जियों के लिए एमएसपी तय करने की मांग की है.

न्यूज-18 से अपना दर्द साझा करते हुए मो. आरिफ ने कहा कि पढ़ाई- लिखाई कर जब नौकरी नहीं मिली, तो खेती करने लगा सोचा गेंहू-धान से अच्छा नकदी फसल पैदा करूं, पर यहां तो तबाही जैसे हालात हैं. बैगन की खेती की, पर बाजार में दाम ही नहीं मिल रहा. सब्जी कारोबारी 5 रुपये किलो का भाव दे रहे थे, बहुत कहा तो 6 रुपये किलो खरीद ले गए.

आरिफ के मुताबिक खुदरा बाजार में बैगन 15-20 रुपये तक किलो बिक रहा है. लेकिन उसे मात्र 6 रुपये का भाव मिला. अगर केरल जैसा MSP झारखंड में भी होता तो शायद यहां के सब्जी किसानों का ये हाल न होता.
आरिफ जैसा हाल ही महिला किसान रीना देवी का भी है. पूरे परिवार के साथ खेतों में जुटे रहने वाली होचर गांव की रीना देवी कहती है कि और कोई रास्ता नहीं है. बेरोजगारी में खेती ही एकमात्र रोजगार है, इसलिए इसमें लगे रहते हैं. पर अब इसमें नुकसान ही नुकसान है. बीज, खाद, पटवन, बनिहारी से लेकर गोबर तक की खरीद के बाद जब 10 रुपये में चार बंदगोभी किसानों को बेचना पड़ेगा, तो फिर किसान खुशहाल कैसे होगा.

राजधानी के सब्जी बाजार में भले की टमाटर 10-15 रुपये किलो बिक रहा हो, पर किसानों से जिस मूल्य पर टमाटर की खरीद हो रही है उसे सुनकर आप चौंक जायेंगे. किसान कुंवर साव ने सरकार से मदद की गुहार लगाते हुए कहा कि 10 रुपये में चार किलो टमाटर बेचने के बाद वह घर परिवार की जरुरतों को पूरा नहीं कर पाते. घर जाने पर पोता-नाती कुछ डिमांड करता है उसे भी वह पूरा नहीं कर पाते.

इस वर्ष आलू की कीमत भी किसानों को कम मिल रहा है. भाड़े पर खेत लेकर आलू उपजाने वाले किसान को भी हेमंत सरकार से मदद की उम्मीद है. किसान सईदुल अंसारी ने हेमन्त सोरेन सरकार से कहा कि जब आप केंद्र से MSP की मांग कर रहे, किसानों का समर्थन कर रहे हैं, तो उससे पहले झारखण्ड के सब्जी किसानों के लिए msp तय कीजिये, नहीं तो यहां के सब्जी उगाने वाले किसान कंगाल हो जाएंगे.



झारखण्ड के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख से जब news- 18 ने सब्जी उत्पादकों का दर्द बताया और उनकी MSP की मांग का सवाल किया, तो कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य में सब्जियों का msp तय करने के लिए हाई लेबल कमिटी बनाई गई है. रिपोर्ट आने के बाद सब्जियों के न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने को लेकर फैसला लिया जाएगा. बादल पत्रलेख ने किसानों से किये वादे को पूर्ण करने का वचन दिया.

केरल की सरकार ने अपने सब्जी उत्पादक किसानों को बिचौलियों से बचाने के लिए कई सब्जियों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है. उसमें लौकी यानि कद्दू- 09 रुपये, खीरा -08 रुपये, करेला 30 रुपये, भिंडी 20 रुपये, टमाटर 08 रुपये, पत्तागोभी 11 रुपये, आलू 20 रुपये और बिन्स 28 रुपये प्रति किलो तय किया गया है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज