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Good News: कारोबार छोड़ कर झारखंड के युवा किसान कर रहे खेती, आ रहा है करोड़ों का टर्नओवर

Good News: कारोबार छोड़ कर झारखंड के युवा किसान कर रहे खेती, आ रहा है करोड़ों का टर्नओवर

कपड़ों का कारोबार छोड़ कर झारखंड के युवा किसान खेती कर रहे हैं. दो साल से कम अवधि में इनका टर्नओवर 1 करोड़ 30 लाख हुआ है.

कपड़ों का कारोबार छोड़ कर झारखंड के युवा किसान खेती कर रहे हैं. दो साल से कम अवधि में इनका टर्नओवर 1 करोड़ 30 लाख हुआ है.

Farmers News: रांची के नगड़ी में युवा किसान FPO यानी (फार्मर प्रोड्यूसर्स ऑर्गेनाइजेशन) बनाकर संगठित हो रहे हैं. वे 700 एकड़ जमीन में खेती कर रहे हैं. दो साल से कम अवधि में इनका टर्नओवर 1 करोड़ 30 लाख हुआ है. इन किसानों ने आधुनिक तरीके से खेती करके दूसरे किसानों को प्रेरणा दी है. गुमला के कृषि पदाधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि किसानों ने सहजन की खेती से शुरुआत की थी. इसके लिए किसानों को सारी जरूरी संसाधन मुहैया कराए गए. सहजन के साथ-साथ कई अन्य सब्जी जैसे मटर, टमाटर, कच्चू, कद्दू, अदरख, तरबूज, बींस की खेती भी इन्होंने शुरू की.

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रिपोर्ट: कोमल बहल

रांची. अधिकतर हम देखते हैं कि किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले युवा करियर और जॉब के लिए बढ़े शहरों का रुख करते हैं. उनका मानना होता है कि खेती में ज्यादा मुनाफा नहीं है, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हैं जो कारोबार छोड़कर खेती करना पसंद कर रहे हैं. झारखंड की राजधानी रांची (Ranchi) के नगड़ी में युवा किसान FPO यानी (फार्मर प्रोड्यूसर्स ऑर्गेनाइजेशन) बनाकर संगठित हो रहे हैं. वो 700 एकड़ जमीन में खेती कर रहे हैं. दो साल से कम अवधि में इनका टर्नओवर (Turn Over) एक करोड़ 30 लाख हो गया है. इन किसानों ने आधुनिक तरीके से खेती (Agriculture) कर के दूसरे किसानों (Farmers) को प्रेरणा दी है.

गुमला के कृषि पदाधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि किसानों ने सहजन की खेती से शुरुआत की थी. इसके लिए किसानों को सारी जरूरी संसाधन मुहैया कराए गए. सहजन के साथ-साथ कई अन्य सब्जियां जैसे मटर, टमाटर, कच्चू, कद्दू, अदरक, तरबूज, बीन्स की खेती भी इन्होंने शुरू की.

खाड़ी देशों में भी भेजते हैं सब्जियां

युवा किसान गणेश पाहन कहते हैं क‍ि फार्मर प्रोड्यूसर्स ऑर्गेनाइजेशन की शुरुआत जुलाई 2020 से की गई थी. इसकी शुरुआत होते ही यहां की सब्जियां खाड़ी देशों में भेजी जा रही थी. साथ ही देश के बड़े शहरों मुंबई, कोलकाता में भी यहां से सब्जियों की सप्लाई होती है.

कपड़ों का कारोबार छोड़, कर रहे खेती

कपड़ों का कारोबार छोड़ कर खेती कर रहे विनोद केशरी बताते हैं कि कोरोना की वजह से उनका कपड़ा व्यापार ठप हो गया था. परिवार चलाना तक मुश्किल हो गया था. बच्चों के स्कूल की फीस भी नहीं दे पा रहे थे. ऐसे में खेती ही एकमात्र विकल्प दिखा.

वहीं, लॉकडाउन के समय अपनी पत्नी और दो बच्चियों के साथ मुंबई से नगड़ी पहुंचे रवि किसपोटा बताते हैं कि कोरोना की वजह से शहर से गांव आना हुआ. ऐसे में रोजगार की समस्या सामने आ पड़ी थी. लेकिन अब आधुनिक तकनीक से खेती कर के रोजगार के साधन बढ़ गए हैं.

FPO से जुड़े बिरसा उरांव बताते हैं कि एफपीओ से जुड़ने के बाद हम सब मिलकर काम करते हैं. किसानों को पॉली हाउस मिला है. इसके तहत 10 लाख रुपये की राशि मिली, जिसमें 75 प्रतिशत सरकार की ओर से अनुदान दिया गया है.

Tags: Agriculture, Farmers, Farming, Jharkhand news

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