Jharkhand News : राजधानी नहीं पहुंच पा रहा फलों का राजा, कौड़ियों के दाम बिक रही महीनों की मेहनत

रांची के करीबी गांव में आम की बंपर पैदावार हुई.

रांची के करीबी गांव में आम की बंपर पैदावार हुई.

अनगड़ा प्रखंड में 550 एकड़ में मनरेगा के तहत आम की जबरदस्त पैदावार हुई है, इसके बावजूद किसानों के हिस्से में बदहाली और भूख ही आ ही रही है. जानिए, किसानों की दुर्गति क्यों और कैसे हो रही है.

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रांची. ज़िले में मनरेगा के तहत इस बार आम की बंपर पैदावार हुई है, लेकिन किसानों के लिए यह खुशी नहीं बल्कि संकट बन गई है. बाज़ार नहीं मिल पाने के कारण ग्रामीण इलाकों में ही ये आम कौड़ियों के दाम बिक रहे हैं. ऐसे में, किसानों के सामने रोज़ी-रोटी की समस्या आ खड़ी हुई है. आम के मौसम में रांची के अनगड़ा प्रखंड के किसानों के चेहरे पर इस बार खुशी के बजाय शिकन देखने को मिल रही है. या तो ग्राहकों को किसान तरस रहे हैं या फिर फलों का राजा कहा जाने वाला आम पेड़ों या बगीचों में ही सड़ रहा है. इस पर, तुर्रा यह है कि किसान के हाथ खाली हैं, लेकिन बिचौलिये अपनी जेबें भरने से चूक नहीं रहे.

पूरे अनगड़ा प्रखंड के 550 एकड़ में मनरेगा के तहत आम की बंपर पैदावार हुई है. लेकिन, कोरोना की मार और लॉकडाउन की वजह से ग्रामीण इलाकों से आम राजधानी के बाज़ारों तक नहीं पहुंच रहे. कुचू और टाटी पंचायत समेत कई गांवों के करीब 620 से ज्यादा किसानों की रोज़ी रोटी आम के भरोसे है. अब लॉकडाउन की मार ने आम किसानों को बदहाली के कगार पर पहुंचा दिया है.

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किसानों को आम के सही दाम नहीं मिल रहे.

क्या है किसानों का दर्द?

गांव के किसान बालेश्वर बेदिया बताते हैं कि आम की पैदावार तो जबरदस्त हुई है लेकिन इस लॉकडाउन में बिचौलियों की चांदी हो गई है. गांव में ही आम कौड़ियों के दाम बिक रहे हैं या फिर पेड़ों पर ही सड़ना मजबूरी है. इसी तरह, बदरी गांव की महिला किसान पंचमी की मानें तो ऐसे हालात में घर परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है. पंचमी बताती हैं कि मुख्य रूप से आम की फसल की बिक्री से ही साल भर उसका परिवार चलता है. लेकिन इस बार हालात उलट हैं.

मुसीबत आई है तो छप्पर फाड़ के!



किसानों की महीनों की मेहनत के दाम तो दूर रहे, शाम के समय हाथी भी उनकी मेहनत को चट कर जा रहे हैं. आम के पौधों को हो रहा यह नुकसान गरीबी में आटा गीला होने जैसा है. इन तमाम परेशानियों के बीच किसानों को यहां मनरेगा के तहत इंटर क्रॉपिंग खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि आम के पौधों के साथ ही, किसान सब्जी की खेती भी कर सकेंं.

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दूसरी तरफ, किसानों के रुझान को देखते हुए इस बार बरसात के महीने में करीब 200 एकड़ में मनरेगा के तहत आम के पौधे लगाए जाएंगे. ऐसे में, किसान सरकार से मांग कर रहे हैं उनकी फसल को बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए. आपको बता दें कि अनगड़ा प्रखंड के बदरी गांव को आम के गांव के नाम से जाना जाता है. गांव में मनरेगा के तहत आम्रपाली और मल्लिका किस्म के साथ-साथ मालदा आम की भी जबरदस्त पैदावार हुई है.

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