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रिम्स में भ्रष्टाचार का खेल! पति हुआ ब्लैक लिस्ट, तो पत्नी को मिला किचन का ठेका

News18 Jharkhand
Updated: January 20, 2020, 11:11 AM IST
रिम्स में भ्रष्टाचार का खेल! पति हुआ ब्लैक लिस्ट, तो पत्नी को मिला किचन का ठेका
रिम्स में किचन टेंडर देने के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल खेला गया (फाइल फोटो)

गत 16 अक्टूबर को रिम्स की टेक्निकल कमेटी ने दोबारा लाइफ लाइन को सलेक्ट करने से इनकार कर दिया था. लेकिन रिम्स निदेशक के निर्देश पर बनी नई कमेटी ने इसे अब किचन का ठेका देने के लिए सलेक्ट कर लिया है.

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रांची. झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में किचन का ठेका देने के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल खेला गया है. दरअसल मरीजों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए जिस आउट सोर्स एजेंसी को अस्पताल की टेक्निकल कमेटी ने दो बार रिजेक्ट कर दिया. अब उसी एजेंसी को अस्पताल की नई कमेटी ने इसके लिए सलेक्ट कर लिया है.

दरअसल वर्तमान कंपनी प्राइम सर्विसेज पर भोजन देने में अनियमितता को लेकर कई बार पेनाल्टी लगाई गई है. ऐसे में प्रावधान के अनुसार वह टेंडर में शामिल नहीं हो सकती है. लेकिन इसी कंपनी के निदेशक के रिश्तेदारों के नाम पर बनी नई एजेंसी, लाइफ लाइन को अस्पताल की नयी कमेटी ने टेक्निकल कमेटी की अनुशंसा के विरुद्ध सलेक्ट कर लिया. नयी कमेटी की सात नवंबर को बैठक हुई. रिम्स निदेशक की उपस्थिति में महज एक घंटे की बैठक में नयी कमेटी ने लाइफ लाइन को ठेका देने के लिए सलेक्टर कर लिया.

पहले रिजेक्ट अब सलेक्ट

हालांकि उस दिन रिम्स अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप ने उक्त एजेंसी को अयोग्य पाते हुए उसकी अनुशंसा करने से इनकार कर दिया था. लेकिन अस्पताल प्रबंधन के लगातार दबाव के बाद आखिरकार अधीक्षक ने भी शुक्रवार को अपना हस्ताक्षर कर दिया. हद तो यह है कि जिस टेक्निकल कमेटी ने एजेंसी को रिजेक्ट किया और जिस नयी कमेटी ने सलेक्ट किया, दोनों में अधीक्षक शामिल हैं.

रिम्स में मरीजों को बेड पर खाना उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी वर्तमान में प्राइम सर्विसेज पर है. इसके एवज में रिम्स प्रबंधन कंपनी को हर माह औसतन 46-47 लाख रुपए भुगतान करता था. कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट 6 जून 2019 को ही समाप्त हो गया. नयी कंपनी के चयन के लिए मार्च, 2019 में टेंडर निकाला गया था. जिसका लास्ट डेट 16 अप्रैल था. इसमें छह कंपनियां शामिल हुईं. जिसमें आमिर इंटरप्राइजेज, लाइफ लाइन, सोनार बंगला, जेना, घोष एंड रॉय तथा क्वालिटी कैटरर शामिल थे. पूर्व में प्रो. डॉ. आरके श्रीवास्तव की अध्यक्षता में गठित टेक्निकल कमेटी ने आमिर इंटरप्राइजेज और लाइफ लाइन को छांट दिया था.

आमिर इंटरप्राइजेज के पास जहां कुछ माह के अनुभव की कमी थी, वहीं लाइफ लाइन के पास एक साल का अनुभव कम था और अन्य कागजात भी अधूरे थे. हालांकि प्रबंधन की ओर से लाइफ लाइन को सलेक्टर करने का काफी दबाव बनाया गया. लेकिन नियम विरुद्ध उसका चयन करने से दो दफा टेक्निकल कमेटी ने इनकार कर दिया. गत 16 अक्टूबर को जब टेक्निकल कमेटी ने फिर से लाइफ लाइन का चयन करने से इनकार कर दिया. और 19 नवंबर को प्राइस बिड खोलने की तिथि निर्धारित की गई. तब रिम्स निदेशक ने अधीक्षक की अध्यक्षता में लाइफ लाइन को सलेक्ट करने के लिए नयी कमेटी बना दी थी.

प्राइम सर्विसेज के संचालक के रिश्तेदार हैं लाइफ लाइन की प्रोपराइटर वर्तमान कंपनी प्राइम सर्विसेज पर खाना चोरी व अन्य अनियमितताओं को लेकर कई बार पेनाल्टी लग चुकी है. जिसके कारण पूर्व निर्धारित शर्तों के अनुसार यह कंपनी टेंडर में शामिल नहीं हो सकती है. लेकिन अब जिस एजेंसी लाइफ लाइन को इसके लिए सलेक्ट किया गया है, उनके प्रोपराइटर प्राइम सर्विसेज के प्रोपराइटर के रिश्तेदार हैं. प्राइम सर्विसेज के प्रोपराइटर राजीव सहगल की पत्नी मोनिका सहगल और जगदीप सूरी की बहन नीलम लाइफ लाइन की प्रोपराइटर हैं.

रिम्स निदेशक की ये है सफाई 

रिम्स की टेक्निकल कमिटी के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ आर के श्रीवास्तव ने कहा कि टेक्निकल कमेटी ने सभी एजेंसियों के मूल्यांकन के बाद दो कंपनियों को रिजेक्ट किया था. अब आगे प्रबंधन की ओर से क्या किया जा रहा है, इसपर मुझे कुछ नहीं कहना है.

वहीं पूरे मामले में रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिंह ने सफाई दी कि टेंडर में विलंब हो रहा था, जिसपर आए दिन मीडिया में खबरें आ रही थीं. टेक्निकल कमेटी ने जिन कागजातों के आधार पर लाइफ लाइन को रिजेक्ट किया था. उसे बाद में कंपनी ने पूरा कर लिया. जिसके बाद नयी कमेटी ने उसका सलेक्शन किया है.

रिपोर्ट- उपेन्द्र कुमार

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First published: January 20, 2020, 11:10 AM IST
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