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रांची: 250 साल के इतिहास में पहली बार रामनवमी पर तपोवन मंदिर रहा बंद
Ranchi News in Hindi

News18 Jharkhand
Updated: April 2, 2020, 11:04 PM IST
रांची: 250 साल के इतिहास में पहली बार रामनवमी पर तपोवन मंदिर रहा बंद
रामनवमी पर रांची के तपोवन मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती थी, लेकिन इस बार सन्नाटा पसरा रहा.

मंदिर कमेटी के सदस्य अमित बजाज ने बताया कि कोरोना (Corona) के खतरे को देखते हुए दर्शन के लिए मंदिर (Tapovan Mandir) का कपाट नहीं खोला गया. भक्तों से आग्रह किया गया कि वे अपने-अपने घरों में सुरक्षित रहकर भगवान राम के लिए दीप जलाएं.

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रांची. सरहुल के बाद कोरोना (Corona) का असर रामनवमी (Ramnavmi) पर भी दिखा. राजधानी में इस बार सालों की परंपरा के विपरित सादे अंदाज में रामनवमी मनाई गई. लॉकडाउन के चलते निवारणपुर स्थित श्री राम जानकी तपोवन मंदिर (Tapovan Temple) के कपाट नहीं खोले गए. मंदिर के ढाई सौ साल से ज्यादा के इतिहास में यह पहला मौका रहा कि रामनवमी पर मंदिर का मुख्यद्वार बंद रहा.

कोरोना के चलते बंद रहा मंदिर का मुख्यद्वार 

मंदिर कमेटी के सदस्य अमित बजाज ने बताया कि कोरोना के खतरे को देखते हुए दर्शन के लिए मंदिर का कपाट नहीं खोला गया. भक्तों से आग्रह किया गया कि वे अपने-अपने घरों में सुरक्षित रहकर भगवान राम के लिए दीप जलाएं. हनुमान चालीसा और श्री रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें. हालांकि मंदिर में पुजारियों ने नियमित पूजा अर्चना की.



तपोवन मंदिर में जुलूसों के जमा होने की रही है परंपरा 



रांची में रामनवमी के दिन विशाल महावीरी झंडों के साथ शोभायात्रा और जुलूस निकालने की परंपरा रही है. ढोल नगाड़ों की गूंज के बीच विभिन्न अखाड़ों के जुलूस एक-दूसरे से मिलते हुए विशाल शोभायात्रा के रूप में तपोवन मंदिर पहुंचते हैं. यह परंपरा साल 1929 से चली आ रही है.

रामनवमी पर राजधानी रही खामोश 

लेकिन रांची में इस बार रामनवमी पर सड़कें पूरी तरह वीरान रहीं. श्रीराम भक्त हनुमान जी के सभी मंदिरों में श्रीराम के उद्घोष की गूंज के बजाय खामोशी ही नजर आयी. रांची के तपोवन, हिनू, रातू रोड, बरियातू, कांके और कोकर की तरफ से आने वाले तमाम रास्तों पर जुलूस के बजाय सन्नाटे का साया ही पसरा दिखा. हर साल सड़क और मंदिर जहां केसरिया रंग से रंग जाते थे. वहीं इस बार मंदिरों में चंद झंडे और कुछ पताके ही नजर आये.

1800 अखाड़ों से निकलता था जुलूस

रांची जिले में परंपरा के अनुसार छोड़े बड़े मिलाकर हर साल करीब 1800 अखाड़ों का जुलूस रामनवमी पर निकलता था. श्री महावीर मंडल, रांची के सदस्य ललित ओझा बताते हैं कि इस बार कोरोना को लेकर रामनवमी जुलूस संभव नहीं था. लिहाजा धार्मिक माहौल में भी सामाजिक दूरी का पूरी तरह से पालन किया गया. उन्होंने पिछली रामनवमी को याद करते हुए बताया कि पिछले साल सबसे बड़ा और भव्य झंडा पुंदाग, दर्जी मुहल्ला डोरंडा, धोबी मुहल्ला, रातू रोड और अमरावती कॉलोनी चुटिया का था. लेकिन इस बार रांचीवासियों की सबसे बड़े और भव्य झंडे के दर्शन की आस अधूरी रह गयी.

सीएम ने भी की पूजा 

दरअसल कोरोना को लेकर सरकार और रांची जिला प्रशासन की ओर से सरहुल और रामनवमी पर जुलूस नहीं निकालने का निर्देश दिया गया था. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रामनवमी पर सीएम हाउस स्थित हनुमान मंदिर में पूजा की. और राजवासियों को शुभकामनाएं देते हुए घरों में ही रामनवमी मनाने की अपील की.

इनपुट- संजय सिन्हा

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First published: April 2, 2020, 11:00 PM IST
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