बिहार सरकार में मंत्री रहे बंदी उरांव का निधन, अलग झारखंड के लिए किया लंबा संघर्ष

बंदी उरांव ने आईपीएस की नौकरी छोड़ सियासत में कदम रखा था.

बंदी उरांव ने आईपीएस की नौकरी छोड़ सियासत में कदम रखा था.

बंदी उरांव साल 1980 में गिरिडीह के एसपी के पद पर रहते हुए नौकरी से त्यागपत्र देकर कार्तिक उरांव की प्रेरणा से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी. बाद में वे बिहार सरकार में मंत्री बने.

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रांची. लंबे समय से बीमार चल रहे कांग्रेसी नेता व सिसई के पूर्व विधायक बंदी उरांव (Bandi Oraon) का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया. साल 1980 में गिरिडीह के एसपी के पद पर रहते हुए उन्होंने नौकरी से त्यागपत्र देकर कार्तिक उरांव के प्रेरणा से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी. उनके पुत्र अरुण उरांव भी पुलिस अधिकारी रह चुके हैं, जो अभी भाजपा में हैं. पुत्रवधु गीताश्री उरांव भी कांग्रेस की टिकट पर विधायक रह चुकी हैं.

केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने ट्वीट करते लिखा कि पूर्व आइपीएस अधिकारी, बिहार सरकार में मंत्री रहे और भाजपा नेता डॉ अरूण उरांव के पिता बंदी उरांव जी के निधन का दुखद समाचार मिला. उनका आदिवासियों के उत्थान में बड़ा योगदान रहा. भगवान उनको अपने श्री चरणों में स्थान दे. उनके परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदना.

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और छोटानागपुर संताल परगना कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बंदी उरांव के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है. मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने तथा शोक संतप्त परिजनों को दुःख की इस घड़ी को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है.

बंदी उरांव सत्ता का विकेंद्रीकरण पंचायती राज के हिमायती रहे. झारखंड प्रदेश में जल, जंगल और जमीन के हिमायती के साथ- साथ आदिवासी समाज के अग्रिम और बौद्धिक जगत के रूप जानने वाले के साथ झारखंड अलग राज्य के कर्मठता के साथ बौद्धिक विचार प्रवाह करने वाले के रूप में जाने जाते थे. झारखंड के समाज में उनके काम की मौजूदगी सदा बनी रहेगी.

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