पुलिस हिरासत में मौत मामले में चार पुलिस कर्मियों को कारावास

पुलिस ने सिरमगांव से पारसनाथ को नक्सली कह कर गिरफ्तार किया और फिर उसे पिपराटांड ओपी लाकर उसकी पिटाई की. लेकिन पिटाई से जब उसकी हालत बिगड़ने लगी तब तत्काल उसे अस्पताल ले गए. मगर अस्पताल में उसे बचाया नहीं जा सका. उसकी मौत हो गई.

Manoj Kumar | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: February 14, 2018, 11:09 PM IST
पुलिस हिरासत में मौत मामले में चार पुलिस कर्मियों को कारावास
राकेश कुमार अधिवक्ता , सिविल कोर्ट
Manoj Kumar | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: February 14, 2018, 11:09 PM IST
पुलिस कस्टडी में एक निर्दोष की मौत के एक मामले में आज बुधवार को रांची में सीबीआई की विशेष अदालत ने एक डीएसपी समेत चार पुलिसकर्मियों को पांच - पांच साल सश्रम कारावास और एक एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. कोर्ट ने पीड़ित परिवार को पैसे देने का भी निर्देश दिया है.

बता दें कि यह मामला पांकी थाना क्षेत्र का है जहां वर्ष 1998 में पारसनाथ सिंह नामक व्यक्ति की मौत पुलिस कस्टडी में हो गई थी. जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार पुलिस ने सिरमगांव से पारसनाथ को नक्सली कह कर गिरफ्तार किया और फिर उसे पिपराटांड ओपी लाकर उसकी पिटाई की. लेकिन पिटाई से जब उसकी हालत बिगड़ने लगी तब तत्काल उसे अस्पताल ले गए. मगर अस्पताल में उसे बचाया नहीं जा सका. उसकी मौत हो गई.

सीबीआई ने इस मामले की 2001 में जांच शुरू की थी. जांच में पांच पुलिसकर्मी दोषी पाये गए. इनमें से एक आरोपी की मौत हो गई. मगर चार पुलिसकर्मियों में तत्कालीन डीएसपी दीनानाथ रजक, इंस्पेक्टर देव लाल, थाना पभारी इंस्पेक्टर सुरेंद्र प्रसाद और थाना प्रभारी पांकी रुखसार अहमद को बुधवार को सजा सुनाई गई. पुलिस कस्टडी में हुई मौत के मामले में पुलिसकर्मियों को सजा सुनाए जाने की अपनी तरह की यह पहली घटना है.

 
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