झारखंड के 10 हजार से ज्यादा फुटबॉल खिलाड़ियों का भविष्य अधर में, 4 साल से नहीं हुई कोई लीग

ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन के निर्देश के बावजूद झारखंड में खिलाड़ियों और रजिस्टर्ड क्लबों का CRS नहीं हो पाया है.

Football in Jharkhand: झारखंड में पिछले 4 सालों से किसी तरह के लीग का आयोजन नहीं से 10 हजार से ज्यादा खिलाड़ियों का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना टूटता नजर आ रहा है.

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रांची. दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल फुटबॉल (Football) को गरीबों का खेल भी कहा जाता है. ऐसे में जिस गरीब प्रदेश झारखंड में फुटबॉल को आसमान की बुलंदियों को छूना चाहिए था. आज वह एसोसिएशन की राजनीति में फंसकर मंझधार में खड़ा है. हाल यह है कि 4 साल से लीग नहीं होने की वजह से 10 हजार से ज्यादा फुटबॉल खिलाड़ियों का भविष्य बर्बाद होने की कगार पर है.

जुलाई, अगस्त और सितंबर, शायद यही वे 3 महीने हैं जिसमें झारखंड में फुटबॉल अपने चरम पर होता है. लेकिन झारखंड फुटबॉल एसोसिएशन (Jharkhand Football Association) के उदासीन रवैये और सुस्त चाल की वजह से राज्यभर में फुटबॉल इन दिनों खामोश पड़ा है. पिछले 4 सालों से राज्य भर में किसी तरह के लीग के आयोजन नहीं से राज्यभर के 10 हजार से ज्यादा खिलाड़ियों का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना टूटता नजर आ रहा है.

झारखंड फुटबॉल एसोसिएशन के सदस्य आशीष बोस ने बताया कि आधिकारिक लीग मैचों के आयोजन नहीं होने से शहरी और ग्रामीण प्रतिभाओं का फोकस अब स्थानीय स्तर पर खेले जाने वाले खस्सी टूर्नामेंट तक ही सीमित रह गया है.

दरअसल राज्य स्तर पर फुटबॉल का संचालन झारखंड फुटबॉल एसोसिएशन के जिम्मे है. जबकि हर जिला स्तर पर भी एसोसिएशन काम करता है. वहीं रांची में फुटबॉल को छोटानागपुर एसोसिएशन की एडहॉक कमेटी ही देखती है. लेकिन मजेदार बात यह है कि झारखंड फुटबॉल एसोसिएशन का संचालन फिलहाल गिरिडीह से हो रहा है, क्योंकि एसोसिएशन के सचिव गुलाम रब्बानी गिरिडीह के ही रहने वाले हैं.

हटिया बॉयज क्लब के कोच राजकुमार सेनापति बताते हैं कि अभी तक AIFF यानी ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन के निर्देश के बावजूद झारखंड में खिलाड़ियों और रजिस्टर्ड क्लबों का CRS नहीं हो पाया है. जो कि बेहद जरूरी है. सेंट्रल रजिस्ट्रेशन सिस्टम में नाम दर्ज नहीं होने पर खिलाड़ी लीग मैच, सीनियर लेवल या फिर संतोष ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंट के लिए नहीं खेल सकते.

दरअसल फुटबॉल में अंडर 12 के साथ ही खिलाड़ी स्कूली स्तर पर खेलना शुरू करते हैं. जिसके बाद अंडर 14, 16, 17 और अंडर 19 के बाद बतौर सीनियर खिलाड़ी के रूप में पहचान बनती है. अंडर-19 से पहले ही खिलाड़ी कई लीग मैच खेल चुके होते हैं जहां से उनके सीनियर लेवल पर खेलने का रास्ता साफ होता है. लेकिन झारखंड में पिछले 4 सालों से लीग के आयोजन की नाकामी खिलाड़ियों के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगा रही है

फुटबॉल के जरिए एजी ऑफिस में नौकरी कर रहे विनय गांगुली की माने तो अभी तक एडहॉक कमेटी का चुनाव नहीं हो पाया है. जिसके कारण एआईएफएफ के गाइडलाइंस के पालन में दिक्कतें आ रही हैं.

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