Jharkhand: रात्रि पाठशालाओं में संवर रहा गरीब आदिवासी बच्चों का भविष्य, जानिए डिटेल

राजधानी रांची से 35 किमी दूर उचरी गांव में ज्ञान बांटने की एक ऐसी ही पाठशाला चल रही है..

राजधानी रांची से 35 किमी दूर उचरी गांव में ज्ञान बांटने की एक ऐसी ही पाठशाला चल रही है..

Jharkhand Night School: रात्रि पाठशाला में गरीब दलित और आदिवासी छात्रों का भविष्य संवारा जा रहा है. बच्चों के अभिभावक भी खुश हैं रात्रि पाठशाला में कंप्यूटर शिक्षा की भी व्यवस्था की गई है.

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रांची. अब तक आपने सरकारी या निजी स्कूल के बारे में सुना और देखा होगा. झारखंड में भी हजारों की संख्या में सरकारी और निजी स्कूल इस वक्त बच्चों के बीच शिक्षा का अलख जगा रहे हैं. आज बात ऐसे स्कूल की करेंगे, जो सामाजिक सहयोग से संचालित स्कूल की श्रेणी में शामिल हैं. आपको जानकर ये हैरानी होगी कि ऐसे स्कूलों की संख्या 26 के आंकड़े को छू चुकी है. ये तमाम स्कूल रात्रि पाठशाला के नाम से संचालित हो रहे हैं.

कहते है ज्ञान बांटने से बढ़ता है. राजधानी रांची से 35 किमी दूर उचरी गांव में ज्ञान बांटने की एक ऐसी ही पाठशाला चल रही है और वो भी रात्रि पाठशाला. रात्रि पाठशाला में आपको अनुशासन, लगन और समर्पण का बेजोड़ संगम देखने को मिलेगा. कल तक जो बच्चे शाम ढलने के बाद या तो सो जाया करते थे या घर के काम में अपने माता-पिता का हाथ बंटाते थे, आज वो बल्ब की रोशनी में अपना भविष्य संवारने में जुटे हैं. बगैर बेंच-डेस्क के ठंड में जमीन पर बैठकर तालीम पाने वाले के बच्चें गरीब-दलित और आदिवासी परिवार से आते हैं.

एक छोटा सा प्रयास और 26 रात्रि पाठशाला

मांडर विधानसभा क्षेत्र का उचरी गांव विकास की दौड़ में बहुत ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाया है. गांव में रात्रि पाठशाला की शुरुआत राज्य के पूर्व IPS अधिकारी अरुण उरांव के एक छोटे प्रयास से शुरू हो पाई. गांव के इस बाल संसद भवन में रोजाना शाम 6 बजे से रात 8 बजे तक रात्रि पाठशाला लगती है. अब तक इस पाठशाला में हाजरी लगाने वाले छात्रों की संख्या 170 से ज्यादा हो चुकी है. पाठशाला यही तक सीमित नहीं है बल्कि रांची-गुमला और लोहरदगा जिले में अब तक 26 रात्रि पाठशाला रोजाना चल रही हैं. दो हजार के करीब रात्रि पाठशाला में ज्ञान बांटने वाले शिक्षक गांव के ही पढ़े-लिखे नौजवान हैं जो ना तो कोई तनख्वाह लेते हैं और ना ही कभी कोई छुट्टी.
क्या कहते हैं गांव के लोग

उचरी गांव के लोग बाबा कार्तिक उरांव के नाम से संचालित इस रात्रि पाठशाला में अपने बच्चों का उज्ज्वल भविष्य देख रहे हैं रात्रि पाठशाला बच्चों को शिक्षित करने के साथ-साथ उन्हें उनकी संस्कृति के साथ जुड़े रहने का भी पाठ पढ़ा रही है. बच्चों के अभिभावक खुश हैं कि उनके बच्चे बगैर सरकारी मदद के स्पेशल क्लास अटेंड कर रहे हैं. रात्रि पाठशाला में कंप्यूटर शिक्षा की भी व्यवस्था की गई है.

झारखंड के लिये आदर्श बना रात्रि पाठशाला



गांव की ये रात्रि पाठशाला झारखंड के लिये आदर्श पाठशाला से कम नहीं. खासकर तब जब सामाजिक सहयोग से ऐसी पाठशाला का संचालन हो रहा हो क्योंकि जब सरकार की सोच और विभाग की पहुंच एक सीमा पर आकर ठहर जाती है, तब सामाजिक पहल ही बदलाव की नई दिशा तय कर सकता है.
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