ऑक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भर बना झारखण्ड, सरकार बनाएगी Oxygen Bank

ऑक्सीजन बैंक बनाएगी सरकार, कोरोना की दूसरी लहर का खतरनाक रूप देख आत्मनिर्भर बन रहा झारखंड.

ऑक्सीजन बैंक बनाएगी सरकार, कोरोना की दूसरी लहर का खतरनाक रूप देख आत्मनिर्भर बन रहा झारखंड.

नेशनल क्लीनिकल रजिस्ट्री के अनुसार पहली लहर में लोगों में सांस की तकलीफ 41.7 प्रतिशत थी, जो दूसरी लहर में बढक़र 47.5 प्रतिशत हो गई. यह एक चिंताजनक स्थिति रही. सांस की तकलीफ बढऩे पर मेडिकल ऑक्सीजन की मांग भी बढऩे लगी. मुख्यमंत्री हालात पर लगातार नजर बनाए रखे हैं.

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रांची. कोरोना संक्रमण (Corona infection) की दूसरी लहर पहले के मुकाबले ज्यादा खतरनाक रही. नेशनल क्लीनिकल रजिस्ट्री के अनुसार पहली लहर में लोगों में सांस की तकलीफ 41.7 प्रतिशत थी, जो दूसरी लहर में बढक़र 47.5 प्रतिशत हो गई. यह एक चिंताजनक स्थिति रही. सांस की तकलीफ बढऩे पर मेडिकल ऑक्सीजन की मांग भी बढऩे लगी. मुख्यमंत्री हालात पर लगातार नजर बनाए रखे हैं. इसी को लेकर सरकार ने ऑक्सीजन बैंक बनाने के साथ झारखंड को ऑक्सीजन के मामले में आत्मर्भिर बनाने की पहल की.  राज्य के विशेषज्ञों की भी राय रही कि जिस तरह से संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए राज्य को ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ाना होगा.

संक्रमित मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए ऑक्सीजन टास्क फोर्स का गठन किया गया. टास्क फोर्स द्वारा राज्य में ऑक्सीजन का उत्पादन कैसे बढ़े, ऑक्सीजन सिलेंडर व जरूरी उपकरणों की उपलब्धता और अस्पतालों तक निर्बाध आपूर्ति कैसे हो, इस पर योजना बनाकर काम किया गया. अप्रैल 2021 तक राज्य में 12 ऑक्सीजन रिफिलिंग यूनिट थी. ये यूनिट प्रतिदिन 6000 से 7000 सिलेंडर को रिफिल करने की क्षमता रखती थी. राज्य में कार्यरत पांच ऑक्सीजन निर्माताओं द्वारा 315 टन ऑक्सीजन का उत्पादन किया जा रहा था. 22 अप्रैल तक इस क्षमता को बढ़ाकर 570 टन प्रतिदिन किया गया.

इसके बाद भी राज्य में ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता को और बढ़ाने का काम जारी रहा. परिणाम यह रहा कि झारखंड अब दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों को पहले से अधिक ऑक्सीजन सप्लाई कर रहा है. 22 अप्रैल 2021 तक राज्य में 80 से 100 टन ऑक्सीजन रोजाना किया गया. ऑक्सीजन बेड की संख्या बढ़ी. अप्रैल माह में पूरे राज्य में 1824 नए ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड उपलब्ध कराए गए.

संजीवनी वाहन की शुरुआत
ऑक्सीजन उपलब्धता को अस्पतालों में सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ने संजीवनी वाहन की शुरुआत की. संजीवनी वाहनों की शुरुआत होने से काफी फायदा हुआ. इन वाहनों में 24 घंटे ऑक्सीजन सिलेंडर लदे होते हैं.

ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड की संख्या में इजाफा

मई के पहले हफ्ते में राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के मल्टी लेबल पार्किंग में नए कोविड केयर सेंटर की शुरुआत हुई. इसमें 327 ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड हैं.



हेल्पलाइन की शुरूआत

संक्रमण के शुरुआती दौर में मरीजों और उनके परिजनों को अस्पतालों के चक्कर लगाकर खुद ही जानकारी लेनी पड़ रही थी. उससे उन्हें काफी परेशानी हो रही थी. मरीजों की परेशानी को देखते हुए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 104 जारी किया.

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