झारखंड में सरकारी स्कूलों की थाली से गायब होंगे अंडे, बच्चों को मिलेगा सूखा राशन

कोरोना के कारण अक्टूबर 2020 से ही सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अंडा नहीं मिल पा रहा है.

राज्य सरकार (Jharkhand Govt) ने अंडा या फल के बदले कक्षा 1 से 5 तक छात्रों के लिये प्रतिदिन 100 ग्राम और कक्षा 6 से 8 के बच्चों के लिये प्रतिदिन डेढ़ सौ ग्राम चावल देने की घोषणा की है.

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रांची. झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अब बकाया अंडा या फल के बजाय सूखा राशन मिलेगा. कोरोना संक्रमण काल में बंद सरकारी स्कूल के बच्चों को लेकर शिक्षा विभाग ने ये निर्णय लिया है. दरअसल अक्टूबर 2020 से ही सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अंडा नहीं मिल पा रहा है. शिक्षा विभाग का मानना है कि मौजूदा कोरोना काल में बच्चों के घर तक अंडा पहुंचा पाना मुमकिन नहीं है.

कोरोना के संक्रमण काल ने सरकारी स्कूल पर ही नहीं, बल्कि छात्रों के निवाला पर भी ताला लगा दिया है. कोरोना की वजह से साल 2020 के अप्रैल माह से अब तक झारखंड के सरकारी स्कूल बंद है. स्कूल बंद होने की वजह से छात्रों को मध्यान भोजन भी नसीब नहीं हो पा रहा है. राज्य सरकार ने इसका वैकल्पिक व्यवस्था करते हुये कक्षा 1 से 5 तक के लिये प्रतिदिन 100 ग्राम और कक्षा 6 से 8 के लिये प्रतिदिन डेढ़ सौ ग्राम चावल देने की घोषणा की है. जबकि अंडा या फल देने को लेकर छात्रों के खाते में पैसा भेजने का आदेश फिलहाल ठंडे बस्ते में है.

धुर्वा मध्य विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य पी रंजन के मुताबिक मार्च तक चावल का वितरण तो हो गया है, पर अंडा या फल को लेकर कोई दिशा निर्देश अब तक स्कूल को प्राप्त नहीं हुआ. मतलब इस विद्यालय की तरह ही राज्य के दूसरे विद्यालयों को शिक्षा विभाग के आदेश का इंतजार है.

सरकारी स्कूलों में मध्यान भोजन की आवश्यकता को बताने की जरूरत नहीं. खासकर अगर बात अंडे और फल की करें, तो भला कौन स्कूल से अनुपस्थित रह सकता है. मगर कोरोना के संक्रमण काल ने बच्चों के हिस्से का अंडा और फल भी छीन लिया.

झारखंड के सरकारी स्कूलों में अक्टूबर 2020 से अब तक स्कूली छात्रों को ना तो अंडा या फल मिला और ना ही उसके पैसे. अब शिक्षा विभाग ने भारत सरकार के दिशा निर्देश के बाद अंडा और फल की जगह सूखा राशन देने का निर्णय लिया है. शिक्षा विभाग के सचिव राजेश शर्मा के अनुसार वर्तमान हालात में घर- घर जाकर अंडा या फल बांट पाना मुमकिन नहीं है. विभाग ने बच्चों के घर सूखा राशन पहुंचाने को लेकर तैयारी शुरू कर दी है.

झारखंड ही नहीं पूरे देश में इस वक्त कोरोना के तीसरे वेब की तैयारी चल रही है. तीसरे वेब से सबसे ज्यादा खतरा छोटे बच्चों को ही होने का अनुमान है. ऐसे में अंडा या फल के बजाय सूखा राशन उन्हें कितना प्रोटीन दे पाएगा, ये केंद्र और राज्य सरकार को सोचने और समझने की जरूरत है.

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