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ऑपरेशन के बाद बाद भी पैदा हुआ बच्चा तो सरकार 30000 से 2 लाख रुपए तक देगी मुआवजा

झारखंड में फैमिली प्लानिंग के बाद भी अगर बच्चा हुआ तो सरकार देगी मुआवजा.

झारखंड में फैमिली प्लानिंग के बाद भी अगर बच्चा हुआ तो सरकार देगी मुआवजा.

परिवार नियोजन योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में बंध्याकरण और नसबंदी के ऑपरेशन फेल होने पर मिलेगा मुआवजा. सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था के बाद झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ले सकती है फैसला.

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रांची. झारखंड की राजधानी रांची के आमतांड़ इलाके में रहने वाली आरती के दो बच्चे हैं. इनकी परवरिश ठीक तरीके से हो, इसलिए आरती ने 2015 में ही परिवार नियोजन यानी फैमिली प्लानिंग योजना के तहत ऑपरेशन कराया था. लेकिन ऑपरेशन के एक साल बाद ही आरती फिर से मां बन गईं. अब आरती की इच्छा है कि उसे सरकार से मुआवजा मिले, ताकि वह अपने तीसरे बच्चे की ठीक से परवरिश कर सके.

स्वास्थ्य विभाग की परिवार नियोजन योजना का लाभ उठाने और लापरवाही की वजह से तीसरा बच्चा पैदा करने की यह कहानी सिर्फ आरती की नहीं है. राज्य सरकार को भी इन महिलाओं की बेबसी का इल्म है, संभवतः इसीलिए हेमंत सोरेन सरकार बंध्याकरण या नसबंदी ऑपरेशन फेल होने के बाद गर्भ ठहरने के मामलों में मुआवजा देने वाली है. बंध्याकरण यानी परिवार नियोजन के तहत ऑपरेशन के बाद अगर गर्भ ठहरा तो ऐसे लाभार्थी पुरुषों या महिलाओं को मुआवजा मिलेगा. इसकी राशि 30 हजार से 2 लाख रुपए तक होगी.

झारखंड में परिवार नियोजन की नोडल अफसर डॉ. विभा सिंह News18 से कहती हैं कि अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इन मामलों में पुरुषों या महिलाओं को मुआवजा देने का प्रावधान था. मगर सर्वोच्च न्यायालय की एक रूलिंग के बाद अब झारखंड सरकार को भी 30 हजार से लेकर दो लाख रुपये तक का मुआवजा देना होगा. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने फ़ाइल आगे बढ़ा दी है. सरकार की इस पहल से परिवार नियोजन फेल होने की स्थिति में न चाहते हुए भी परिवार बढ़ जाने का बोझ सहने वाली आरती जैसी महिलाओं को सरकार के इस फैसले से राहत मिल सकेगी.



न्यूज 18 के साथ बातचीत में आरती ने कहा कि उसने 2015 में रातू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जाकर बंध्याकरण का ऑपेरशन कराया था, लेकिन 2019 में गर्भ रह गया. 2020 में आरती को तीसरी संतान हुई. पहले से ही दो बच्चों की मां आरती कहती हैं उसके पति निजी एजेंसी में गार्ड हैं. 5000 रुपये महीने की पगार में तीन बच्चों के साथ जीवन गुजारना मुश्किल है. उम्मीद है कि आरती जैसी महिलाओं को सरकार के फैसले से बड़ी राहत मिलेगी.
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