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40 साल पुरानी डिग्री की सच्चाई जानने रांची पहुंची हरियाणा पुलिस, रिम्स में खंगाला रिकॉर्ड

40 साल पहले लिये गये सर्टिफिकेट की जांच करने की रिम्स पहुंची हरियाणा पुलिस
40 साल पहले लिये गये सर्टिफिकेट की जांच करने की रिम्स पहुंची हरियाणा पुलिस

एसएसपी कार्यालय, हिसार को शिकायत मिली कि रांची मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (RIMS) से निर्गत सत्यपाल सिंह का सर्टिफिकेट (Certificate) नकली है. इसी शिकायत की जांच के लिए हरियाणा पुलिस (Haryana Police) की टीम रिम्स पहुंची.

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रांची. 40 साल पुराने मामले की जांच करने हरियाणा की हिसार पुलिस (Hisar Police) शनिवार को रांची पहुंची. दरअसल साल 1980 में तत्कालीन आरएमसीएच (वर्तमान में रिम्स) से हरियाणा के एक शख्स ने डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्निशयन की डिग्री हासिल की थी. लेकिन हिसार में एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने एसएसपी से शिकायत की कि उस शख्स की डिग्री (Degree) फर्जी है. और उसने फर्जी डिग्री के आधार पर पहले हरियाणा सरकार में नौकरी की और अब ब्लड बैंक चला रहा है. पूर्व में जब आरटीआई एक्टिविस्ट ने रिम्स से सर्टिफिकेट की वैधता की जानकारी मांगी, तो रिम्स (RIMS) से जवाब दिया गया कि सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर सही लगता है. इसलिए सर्टिफिकेट वैध है. पर रिम्स में कोई कागजात उपलब्ध नही हैं. ऐसे में हरियाणा पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सत्यपाल नामक शख्स ने आरएमसीएच से कोर्स किया था या नहीं.

एसएसपी कार्यालय की मिली शिकायत 

रांची पहुंचे हरियाणा पुलिस के जवान पवन कुमार ने बताया कि एसएसपी कार्यालय, हिसार को शिकायत मिली कि रांची मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल से निर्गत सत्यपाल सिंह का सर्टिफिकेट नकली है. इसी शिकायत की जांच के लिए टीम रिम्स पहुंची है.



पुलिस के साथ रांची आए शिकायतकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट हरपाल सिंह ने कहा कि यह स्वास्थ्य से जुड़ा मसला है. इसलिए वह लगातार कई सालों से इस मुद्दे पर फाइट कर रहे हैं. उनके अनुसार फर्जी सर्टिफिकेट पर न सिर्फ एक व्यक्ति ने सरकारी नौकरी की, बल्कि ब्लड बैंक भी खोल रखा है.


रिम्स के पास कोई रिकॉर्ड नहीं

रिम्स के अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप ने बताया कि साल 1980 का ये मामला काफी पुराना है. उस समय डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्निशयन या अन्य डिप्लोमा की पढ़ाई का कोई रेगुलेशन नहीं था. सम्भव है कि उस समय पैथोलॉजी विभाग स्तर पर कोर्स संचालित करवाता हो. पर आज की तारीख में कोई रिकॉर्ड रिम्स के पास नहीं है. इसलिए रिम्स पैथोलॉजी विभाग के एचओडी से सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर को दिखाया गया, तो उनका कहना है कि हस्ताक्षर सही है.

 
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