ISRO के गगनयान मिशन में जोरशोर से जुटा HEC, कुल 5 में 3 प्रोजेक्टस का काम पूरा
bell-iconcloseButton
bell-iconNOTIFICATIONS VIEW FULL LIST
DISCOVER
TEXT SIZE
SmallMediumLarge
SHARE
हिंदी समाचार / न्यूज / झारखंड / ISRO के गगनयान मिशन में जोरशोर से जुटा HEC, कुल 5 में 3 प्रोजेक्टस का काम पूरा

ISRO के गगनयान मिशन में जोरशोर से जुटा HEC, कुल 5 में 3 प्रोजेक्टस का काम पूरा

इसरो के गगनयान प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में एचईसी जी जान से जुटा हुआ है.
इसरो के गगनयान प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में एचईसी जी जान से जुटा हुआ है.

2022 से 24 तक के इसरो के गगनयान प्रोजेक्ट्स को एचईसी एक टीम भावना के साथ पूरा करने में जुट गया है. इसरो की ओर से डिमांड ...अधिक पढ़ें

  • Last Updated :

रांची. देश का गर्व इसरो का जिक्र जब भी आता है तब एक आम हिंदुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. अंतरिक्ष की दुनिया में तहलका मचाने वाले देशी इसरो के हर प्रोजेक्ट का हमसफर रहा है रांची का एचईसी. अब 2022 से 24 तक इसरो के गगनयान मिशन को मजबूती के साथ पूरा करने में जोरशोर से जुटी है मदर इंडस्ट्री एचईसी.

एचईसी के इसरो प्रोजेक्ट HMBP के चीफ ऑफ प्लानिंग जेपी प्रसाद बताते हैं कि इसरो के किसी भी मिशन की सफलता पर देशभर में जब तालियों की गूंज सुनाई देती है, तब उस गूंज की आवाज से रांची का एचईसी भी गौरवान्वित महसूस करता है. 2001 से ही एचईसी इसरो के कई प्रोजेक्टस को बिना किसी डिफेक्ट्स को लगातार पूरा करता आ रहा है.

अब 2022 से 24 तक के इसरो के गगनयान प्रोजेक्ट्स को एचईसी एक टीम भावना के साथ पूरा करने में जुट गया है. इसरो की ओर से डिमांड किए गये पांच प्रोडक्ट्स को एचईसी अबतक पूरा कर श्रीहरिकोटा भेज चुका है. और अब बचे दो प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है.

इन 5 प्रोडक्ट्स को तैयार कर भेजा गया श्रीहरिकोटा

HSD- होरिजेंटल स्लाइडिंग डोर का काम पूरा कर श्रीहरिकोटा भेजा गया, 56 मीटर ऊंचाई, इसका काम रॉकेट को एसेंबल के दौरान डोर को क्लोज करने के लिए

फोल्डिंग प्लेटफॉर्म- काम पूरा कर श्रीहरिकोटा भेजा गया, 10 लेयर के प्लेटफार्म का इस्तेमाल सैटेलाइट को एसेंबल करन के लिए

व्हील बोगी- मार्च में काम पूरा कर श्रीहरिकोटा भेजा गया, देश में पहली बार इस तरह का प्रोजेक्ट  HEC में पूरा किया गया, सैटेलाइट और रॉकेट को ले जाने का भार इसी पर होता है.

MLP- मोबाइल लॉन्चिंग पेडस्टल के खुद का भार 1000 टन होता है. यह रॉकेट और सैटेलाइट से जुड़े सामानों को उठाकर लॉन्चिंग तक ले जाता है.

EOT- इलेक्ट्रॉनिक ओवरहेड ट्रेवली क्रेन 200 टन का भार उठाने में सक्षम होता है. रॉकेट और सैटेलाइट के एसेंबल से जुड़े सामानों को उठाने में सक्षम

इसरो के तमाम प्रोजेक्टस को पूरा करने के लिए बकायदा एचईसी में अलग-अलग ऑपरेशन हेड के नेतृत्व में काम चल रही है.  इसमें सतीश कुमार प्रोजेक्ट ऑफिसर, राम जनम प्रसाद डिजाइनिंग, संजय सिन्हा सर्विसेज एंड मेंटेनेंस और जयंत चटर्जी प्लानिंग प्रोडक्शन की जिम्मेदारी दी गयी है. बात चंद्रयान और मंगलयान की हो या फिर कमिंग सून गगनयान की एचईसी के बनाये प्रोडक्ट इसरो में कल और आज भी अपनी उपयोगिता को साबित कर रहे हैं. मार्च में इसरो के चेयरमैन ने भी अपने दौरे के दौरान एचईसी की जमकर तारीफ की थी.

एचईसी के कर्मचारी भी इसरो के प्रोजेक्ट्स से जुड़ने पर खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं. उनकी मानें तो उन्हें इस प्रोजेक्ट्स से जुड़कर एक गौरव और देशभक्ति को जाहिर करने का एहसास होता है.

Tags: Jharkhand news, Ranchi news