आदिवासियों की सालों पुरानी मांग सरना कोड को लेकर हेमंत सरकार ने बुलाया विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र

सरना कोड को लेकर सीएम हेमंत सोरेन की अगुआई में जेएमएम विधायक दल की बैठक हुई.
सरना कोड को लेकर सीएम हेमंत सोरेन की अगुआई में जेएमएम विधायक दल की बैठक हुई.

जेएमएम विधायक स्टीफन मरांडी ने कहा भारत में झारखंड पहला राज्य है, जहां आदिवासियों (Tribal) की पहचान, धर्म और जाति के लिए एक बिल (Bill) सदन में लाया जा रहा है.

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रांची. झारखंड में लंबे समय से आदिवासी सरना कोड (Sarna Code) लागू करने की मांग कर रहे हैं. इस सिलसिले में राज्य सरकार (Hemant Government) ने बुधवार को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है. इस सत्र में सरना कोड को लेकर बिल (Bill) सदन में लाया जाएगा.

मंगलवार को सरना कोड को लेकर जेएमएम विधायक दल की बैठक मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में सीएम आवास पर हुई. बैठक के बाद परिवहन मंत्री चम्पई सोरेन ने कहा ये आदिवासियों के अस्तित्व का सवाल है. इसलिए सभी पहलुओं पर चर्चा कर कल सदन में बिल रखा जाएगा. ऐसा नहीं करने से हमारी पहचान ही मिट जाएगी. पूरे देश में 11 करोड़ से अधिक आदिवासी आबादी है.

जेएमएम विधायक स्टीफन मरांडी ने कहा भारत में झारखंड पहला राज्य है, जहां आदिवासियों की पहचान के लिए, धर्म और जाति के लिए एक बिल सदन में लाया जा रहा है. हालांकि यह मामला पूरे देश का है.



विधायक ने कहा कि सरना कोड की मांग आदिवासी सालों से करते आ रहे हैं. इसको जिंदा कर इसका प्रचार प्रसार किया जाएगा. फिलहाल राज्य सरकार इस पर प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजेगी. साथ ही इस विषय को पूरे देश में ले जाने का भी काम किया जाएगा. क्योंकि इस पर अन्य राज्यों की भी सहमति जरूरी है, ताकि कहीं कोई विवाद न हो.
पेयजल स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा जिस प्रकार से केंद्र सरकार आदिवासियों को खत्म करने की कोशिश कर रही है, ऐसे में हमारी सरकार आदिवासियों के पहचान को बरकरार रखने के लिए सिर्फ झारखंड में ही नहीं पूरे देश स्तर पर इस कार्यक्रम की शुरुआत करेगी. अंग्रेज के समय से जिस तरह से आदिवासियों को दबाने की कोशिश की जा रही है, उसे हमारी सरकार खत्म कराएगी.
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