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झारखंड में ओल्ड एज होम के बुजुर्गों की कैसे कटेगी जिंदगी? 2 साल से आंख मूंद रखी है सरकार

झारखंड में ओल्ड एज होम के बुजुर्गों की कैसे कटेगी जिंदगी? 2 साल से आंख मूंद रखी है सरकार

झारखंड के ओल्ड एज होम के बुजुर्ग इनदिनों सरकारी मेहरबानी का इंतजार कर रहे हैं.

झारखंड के ओल्ड एज होम के बुजुर्ग इनदिनों सरकारी मेहरबानी का इंतजार कर रहे हैं.

Jharkhand News: झारखंड में कई ओल्ड एज होम सरकारी राशि पर चल रही हैं. इसमें राजधानी रांची की भी दो संस्थाएं शामिल हैं. लेकिन इन ओल्ड एज होम को पिछले दो सालों से राशि का भुगतान सरकार की ओर से नहीं किया गया है. इससे यहां रहने वाले बुजुर्गों की परेशानी बढ़ी हुई है.

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रांची. राज्य में चल रही तमाम योजनाओं का मकसद गरीबों और जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कुराहट लाना है. ऐसी बातें कहने से राज्य सरकार भी नहीं चूकती है. हम बात करने जा रहे हैं समाज कल्याण विभाग की, जिसकी उदासीनता की वजह से राज्य के तमाम ओल्ड एज होम में रहने वाले बुजुर्गों की हालत दिनोंदिन खराब होती जा रही है. झारखंड में कई ओल्ड एज होम सरकार की वित्त पोषित राशि पर चल रही हैं. इसमें राजधानी रांची की भी दो संस्थाएं शामिल हैं. लेकिन इन ओल्ड एज होम को पिछले दो सालों से राशि का भुगतान विभाग की ओर से नहीं किया गया है.

रांची के पिस्का नगड़ी इलाके के पांडू गांव में साल 2000 से चल रही बिहार समाज कल्याण संस्था में कुल 30 बुजुर्ग रहते हैं. इसमें 22 महिलाएं और 8 पुरुष शामिल हैं. इनमें ज्यादातर लोग रांची, खूंटी, लोहरदगा और आसपास के जिलों के भटके हुए लोग हैं, जिन्हें सरकार और प्रशासन के माध्यम से ही इस संस्था में भेजा जाता है. ‌

बिहार समाज कल्याण संस्था के सचिव पंकज कुमार बताते हैं कि यहां ज्यादातर बुजुर्ग ऐसे हैं, जिन्हें परिवार ने त्याग दिया है. वे इन्हें अपनाने को तैयार नहीं है. ऐसे में सरकारी राशि का भुगतान नहीं होने का खामियाजा ओल्ड एज होम में रहने वाले इन बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है.

पंकज बताते हैं कि इस संस्था को 2019-20 वित्तीय वर्ष में 8.5 लाख का भुगतान किया गया था. लेकिन पिछले दो साल से कोई भी राशि नहीं मिलने की वजह से संस्था को चलाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. दरअसल हर साल संस्था की ओर से अनुमानित खर्च की एक बजट राशि समाज कल्याण विभाग को भेजी जाती है. इसके बाद विभाग की ओर से यह तय किया जाता है किस संस्था को कितनी राशि का भुगतान करना है.

साल 2020-21 और 2021- 22 के लिए भी संस्था की ओर से करीब 15 लाख का सालाना बजट भेजा गया था, लेकिन अभी तक कोई भुगतान नहीं किया गया है. ‌इस वजह से संस्था में काम करने वाले 6 कर्मचारियों को भी 2 साल से भुगतान नहीं किया गया है.

संस्था में रहने वाली बुजुर्ग रेखा देवी बताती हैं कि उन्हें शुगर की बीमारी है. ऐसे में फंड की कमी के कारण दवा के साथ- साथ इलाज में भी काफी परेशानी आ रही है. उन्हें वृद्धा पेंशन का भी लाभ नहीं मिल रहा है.

Tags: Hemant soren government, Jharkhand news

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