झारखंड में पत्थलगड़ी को लेकर दर्ज मुकदमे लिये जाएंगे वापस, CM हेमंत ने दी हरी झंडी

झारखंड में पत्थलगड़ी को लेकर 23 मुकदमे दर्ज हैं.

झारखंड में पत्थलगड़ी को लेकर 23 मुकदमे दर्ज हैं.

Pathalgadi: झारखंड के विभिन्न थानों में पत्थलगड़ी को लेकर 23 मुकदमे दर्ज हैं. इन सभी मुकदमों को राज्य सरकार वापस लेगी.

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रांची. छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act) में संशोधन का विरोध करने के चलते और पत्थलगड़ी करने के क्रम में जिन व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई, उन सभी दर्ज कांडों के प्रत्याहरण से संबंधित गृह विभाग के प्रस्ताव से संबंधित संकल्प प्रारूप को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने स्वीकृति दे दी है. ज्ञात हो कि 29 दिसंबर 2019 को मंत्रिमंडल की बैठक में पत्थलगड़ी (Pathalgadi) से जुड़े सभी दर्ज कांड को वापस लेने का निर्णय लिया गया था.

पत्थलगड़ी  को लेकर विभिन्न थानों में दर्ज  मुकदमों को वापस लेने के सिलसिले में जिलों में त्रिस्तरीय समिति का गठन किया गया था. इस समिति में अध्यक्ष के रूप में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी तथा सदस्य के रूप में  पुलिस अधीक्षक और लोक अभियोजक को रखा गया था. इस सिलसिले में सरायकेला खरसावां, खूंटी, चाईबासा, दुमका और साहिबगंज से प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में  छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम में संशोधन का विरोध करने तथा पत्थलगड़ी करने से संबंधित मुकदमों को वापस लेने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है. ज्ञात हो कि विभिन्न थानों में पत्थलगड़ी को लेकर 23 मुकदमें दर्ज हैं.

क्या है पत्थलगड़ी आंदोलन?

अपने जमीनी हक की मांग को बुलंद करते हुए आदिवासियों ने बीते साल यह आंदोलन शुरू किया था. इसका असर इस बार के चुनाव पर भी काफी देखा गया. माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा, क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने दबी जुबान में पत्थलगड़ी आंदोलन पर निशाना साधा था. उन्होंने यहां तक कहा था कि इस आंदोलन के पीछे देश विरोधी ताकतों का हाथ है.
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