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Opinion: नीति आयोग की बैठक से केंद्र और राज्य के बीच की खाई को पाट सकेंगे हेमंत सोरेन !

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (फाइल फोटो)

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (फाइल फोटो)

Jharkhand Politics: नीति आयोग की बैठक के बारे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि करीब तीन घंटे तक चली नीति आयोग की टीम के साथ बैठक में 20 मुद्दों पर चर्चा हुई. इस बैठक में झारखंड की सभी जरूरी मांगों और समस्याओं को रखा गया.

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रांची. पिछले दिनों झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) की नीति आयोग के साथ एक बैठक हुई. बैठक में कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा बकाए का भुगतान नहीं किया जाने, दामोदर घाटी निगम (DVC) से संबंधित राशि के अपने आप भारतीय रिजर्व बैंक से निकाल लिए जाने और जीएसटी के बकायों से संबंधित मामलों को मुख्यमंत्री ने प्रमुखता से उठाया. सवाल उठता है कि इस बैठक से प्रदेश को क्या हासिल हुआ? झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को उम्मीद है कि नीति आयोग की टीम के साथ बैठक से केंद्र और राज्य के बीच की खाई को पाटने में मदद मिलेगी.

‘‘हम हमेशा देश के संघीय ढांचे को मजबूत करने के पक्ष में हैं और इस प्रकार की पहल निश्चित रूप से हम सभी को ऐसा करने में मदद करेगी, ’’उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था और आशावादी लग रहे थे. उन्हें अभी तक कुछ हासिल तो नहीं हुआ, लेकिन आश्वासन जरूर मिला कि उनकी कुछ शिकायतों का समाधान किया जाएगा. यह याद दिलाते हुए कि केंद्र ने पहले ही राज्य के समेकित कोष से लगभग 2,800 करोड़ रुपये की कटौती की थी. दामोदर घाटी निगम को बिजली शुल्क के भुगतान के लिए प्रदेश सरकार के खाते से अपने आप की जा रही निकासी का उन्होंने विरोध किया और कहा कि जब तक कोल इंडिया लिमिटेड से उन्हें बकाये का भुगतान नहीं मिल जाता, तब तक अपने आप निकासी पर रोक लगनी चाहिए.

सोरेन ने कहा, ‘‘हमने इस तरह की कटौती को तब तक रोक कर रखने का अनुरोध किया है जब तक कि मामला सुलझ नहीं जाता है,’’ नीति आयोग ने सकारात्मक जवाब दिया, जैसा कि उन्होंने जीएसटी मुआवजे के मामले में भी किया था. मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘‘हमें जीएसटी मुआवजे के रूप में लगभग 1,800 करोड़ रुपये मिलेंगे और उम्मीद है कि जल्द ही कानपुर में होने वाली अगली बैठक में कुछ सामने आएगा. उन्होंने यह भी कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड पर झारखंड सरकार को कोयले के खनन के लिए रॉयल्टी और इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल की गई भूमि के मुआवजे के लिए एक बड़ी राशि बकाया है.

सोरेन ने बताया कि ‘‘हमने सदियों पुराने कोयला खनन के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का आकलन करने और यह भी पता लगाने के लिए कि क्या इससे लोगों को फायदा हुआ है, कोल बेल्ट में एक सर्वेक्षण कराने की भी मांग की है. मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि करीब तीन घंटे तक चली नीति आयोग की टीम के साथ बैठक में 20 मुद्दों पर चर्चा हुई. राज्य सरकार ने जिन अन्य मुद्दों को उठाया उनमें बच्चों में प्रचलित कुपोषण को दूर करने के लिए 300 करोड़ रुपये और दामोदर नदी को साफ करने के लिए 600 करोड़ रुपये की मांग शामिल है, जो बहुत प्रदूषित हो गई है.

झारखंड सरकार ने पूर्वोत्तर में लागू अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति उद्यमियों के लिए करों में छूट जैसी विशेष रियायतों की भी मांग की. गौरतलब हो कि नीति आयोग का गठन योजना आयोग का विघटन कर किया गया था. योजना आयोग एक ताकतवर संगठन था और उसके पास वित्तीय ताकत थी. योजनागत विकास का वह एक केन्द्रीय निकाय था, लेकिन नीति आयोग की भूमिका बहुत सीमित हो गई है, इसलिए नीति आयोग से बैठक से क्या हासिल होगा, यह तो तभी पता चलेगा, जब कुछ हासिल हो जाये.

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