झारखंड की कमान संभालने के बाद हेमंत सोरेन के सामने हैं कई चुनौतियां

जनता से किए गए वादों को पूरा करना सीएम हेमंत सोरेन के लिए बड़ी चुनौती (फाइल फोटो)
जनता से किए गए वादों को पूरा करना सीएम हेमंत सोरेन के लिए बड़ी चुनौती (फाइल फोटो)

हेमंत सोरेन (Hemant Soren) के नेतृत्व में महागठबंधन की नई सरकार बनी है. नई सरकार (jharkhand goverment) पर सबकी नजरें टिकी हुई है. जनता ने जिस उम्मीद के साथ बहुमत दिया है उसे पूरा करना किसी चुनौती से कम नहीं है.

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रांची. झारखंड में हेमंत सोरेन (Hemant Soren) के नेतृत्व में महागठबंधन की नई सरकार बनी है. नई सरकार (jharkhand goverment) पर सबकी नजरें टिकी हुई है. जनता ने जिस उम्मीद के साथ बहुमत दिया है उसे पूरा करना किसी चुनौती से कम नहीं है. विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद राज्य में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में महागठबंधन की नई सरकार बनी है. सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में तेजी से विकास का काम करने की वचनबद्धता दोहराई है. विधानसभा चुनाव के वक्त जनता से किए गए वादों को पूरा करना सरकार की प्राथमिकता सूची में है. शायद यही वजह है कि कैबिनेट की पहली बैठक मे ही पत्थलगड़ी और सीएनटी एसपीटी एक्ट के मुद्दे पर सरकार के फैसले देखने को मिलने लगे. इसके अलावे सरकार ने कानून व्यवस्था, किसानों की ऋणमाफी, बिजली और वृद्धावस्था पेंशन जैसी आम लोगों से जुड़ी सुविधा को प्राथमिकता सूची में रख कर काम करना शुरू किया है.

रोजगार से लेकर किसानों की कर्जमाफी बनी बड़ी चुनौती

किसानों की ऋणमाफी पर भारी भरकम राशि खर्च होगी जिसका वहन करना चुनौतीपूर्ण होगा. स्थानीयता को फिर से पुर्नभाषित करना बेहद ही चुनौतीपूर्ण है. जमीन का अधिकार आदिवासियों को देना भी कठिन काम होगा.वहीं सरना धर्मकोड को लागू करने की मांग उठती रही है. राजधानी में जीरो कट बिजली सुविधा, बेरोजगारों को रोजगार देना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण काम होगा. महिलाओं को सरकारी नौकरी में 50 फीसदी आरक्षण और पारा शिक्षकों को स्थायी करना यह भी एक चुनौतीपूर्ण कार्य है. वहीं प्रदेश में शराबबंदी पर पाबंदी लगाना भी  अपने आप में एक बड़ा कार्य होगा. जानकारों का मानना है कि चुनाव के वक्त महागठबंधन के दलों ने जनता से जो वादे किये थे उसे पुरा करना बेहद ही चुनौतीपूर्ण है.  कानून व्यवस्था के अलावे सरकार के लिए सबसे बड़ा चुनौती किसानों की ऋणमाफी है, जिसपर करीब 7000 हजार करोड़ खर्च होगें, जिससे राज्य के सरकारी खजाने पर बोझ पड़ेगा और इसका समावेश कैसे होगा यह सरकार के लिए बेहद ही चुनौतीपूर्ण होगा .



जनता से किए वादों को जुटाने में लगे सीएम हेमंत सोरेन 
नई सरकार के समक्ष ये तमाम चुनौतियां हैं जिसे पूरा करना बेहद ही कठिन काम है. पिछली सरकार के कामकाज और वर्तमान में सरकारी खजाने की स्थिति को भी बखूबी से नई सरकार जान रही है. इन सबके बाबजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जनता से किए हुए वादों को पूरा करने में जुट गए हैं

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