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हेमंत सरकार से नहीं मिला अनुदान, गौशालाओं की 25 हजार गायें भुखमरी के कगार पर

हेमंत सोरेन सरकार में एक वर्ष से अधिक समय से गौशालाओं को अनुदान नहीं मिला.

हेमंत सोरेन सरकार में एक वर्ष से अधिक समय से गौशालाओं को अनुदान नहीं मिला.

झारखंड में बजट सत्र में वित्तमंत्री ने हर जिले में गो मुक्ति केन्द्र की स्थापना करने की बात कही हैं, लेकिन जिस राशि से गायों के लिए चारा पानी की व्यवस्था होती है, वह 14 महीने से ज्यादा समय से बंद है.

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रांची. झारखंड में 26 गौशालाएं हैं जिसमें से 21 झारखंड गो सेवा आयोग से रजिस्टर्ड हैं. नियम के मुताबिक इन 21 गौशालों में रहने वाली प्रति गाय को 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से सरकार को अनुदान देना होता है, लेकिन एक वर्ष से ज्यादा समय से गौशालाओं को अनुदान नहीं दिया गया है. बजट सत्र में वित्तमंत्री हर जिले में गो मुक्ति केन्द्र की स्थापना करने की बात कही हैं, लेकिन जिस राशि से गायों के लिए चारा पानी की व्यवस्था होती वह 14 महीने से ज्यादा समय से बंद है. गोतस्करी से बचाकर पुलिस ने गायों को गोशाला के हवाले तो कर दिया पर सरकार की लापरवाही के चलते अब इनका दाना पानी की व्यवस्था
करना गोशाला के लिए भारी पड़ रहा है. इस गोशाला में 420 के करीब गायें हैं.

नियमानुसार हर गाय के लिए प्रतिदिन 50 रुपये के हिसाब से सरकार को छह महीने की राशि गोशाला को देनी थी. हेमंत सोरेन की सरकार में एक वर्ष से अधिक समय से अनुदान की एक फूटी कौड़ी नहीं मिली है. कांके सुकुरहुटू गोशाला के भीम बैठा कहते हैं कि जब से हेमंत सरकार आई है, गौशालाओं का अनुदान बंद है और मुश्किलें बढ़ रही हैं.

राज्यभर के सभी गौशालाओं की स्थिति बदतर है. जिन बड़े शहरों में दानकर्ता मिल जाते हैं, वहां की स्थिति कुछ बेहतर हैं. बाकी गौशालों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. झारखंड प्रादेशिक गोशाला संघ के संयुक्त सचिव प्रमोद सास्वत के अनुसार राज्य में सभी गौशालाओं को मिलाकर करीब 25 हजार से ज्यादा गौवंशीय पशुओं की स्थिति बेहर खराब हो चली है. कई गौशालों की ओर से 90 लाख रुपये का बिल भी गौसेवा आयोग को भेजा गया है लेकिन उसका भुगतान अभी तक नहीं हो सका है.
झारखण्ड गोसेवा आयोग के अध्यक्ष, सचिव से भी गोशालाओं की दुर्दशा और बंद पड़े अनुदान को लेकर वजह जानने की कोशिश news18 ने कोशिश की लेकिन डोरंडा स्थित गो सेवा आयोग के कार्यालय में कोई नहीं मिला. एक कर्मचारी ने बताया कि अध्यक्ष का पद खाली है और प्रभार पर सचिव हैं, इसलिए दूसरे जगह पर होंगे.
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