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झारखंड में सभी दलों को EC के फैसले का इंतजार, क्या संकट में है हेमंत सोरेन सरकार? समझिए गणित

झारखंड में सभी दलों को EC के फैसले का इंतजार, क्या संकट में है हेमंत सोरेन सरकार? समझिए गणित

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ पत्थर खनन लीज मामले में आने वाले फैसले को लेकर झारखंड की सियासत तेज हो गयी है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ पत्थर खनन लीज मामले में आने वाले फैसले को लेकर झारखंड की सियासत तेज हो गयी है.

Jharkhand News: भारत निर्वाचन आयोग में बसंत सोरेन से जुड़े मामले में 22 अगस्त को सुनवाई निर्धारित है. बसंत सोरेन पर एक खनन कंपनी में साझीदार होने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई गई है कि उन्होंने अपने चुनावी शपथपत्र में इसे छिपाया. बसंत सोरेन दुमका के विधायक हैं. उन्हें विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराने की मांग की गई है.

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रांची. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ पत्थर खनन लीज मामले में भारत निर्वाचन आयोग में सुनवाई और बहस की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद आयोग ने निर्णय सुरक्षित रख लिया है. इसके साथ ही झारखंड में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. सत्तापक्ष ने किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयारी आरंभ कर दी है. कांग्रेस के सारे विधायकों को विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने निर्देश दिया है कि रांची से बाहर बगैर सूचना दिए नहीं जाएं.

भारत निर्वाचन आयोग में बसंत सोरेन से जुड़े मामले में 22 अगस्त को सुनवाई निर्धारित है. बसंत सोरेन पर एक खनन कंपनी में साझीदार होने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई गई है कि उन्होंने अपने चुनावी शपथपत्र में इसे छिपाया. बसंत सोरेन दुमका के विधायक हैं. उन्हें विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराने की मांग की गई है.

जानें विधानसभा की दलीय स्थिति
झामुमो – 30, भाजपा – 26 (बाबूलाल को मिलाकर), कांग्रेस – 18 (प्रदीप यादव को मिलाकर), आजसू – 02, भाकपा माले- 01, राकांपा 01, राजद 01, निर्दलीय 02, मनोनीत – 01. बता दें, झामुमो, कांग्रेस और राजद को मिलाकर सरकार के पास बहुमत से अधिक विधायकों का आंकड़ा है. कांग्रेस के तीन विधायकों की अनुपस्थिति से भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा. राकांपा और भाकपा माले का भी सरकार को समर्थन है. निर्वाचन आयोग के फैसले के बाद पैदा हुई परिस्थितियों के मुताबिक इसपर असर पड़ सकता है.

ऑफिस ऑफ प्रोफिट की 3 कंडीशन 

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माइनिंग लीज मामले में संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप के अनुसार ऑफिस ऑफ प्रोफिट की तीन कंडीशन होते हैं. पहला- कोई पद होना चाहिए, दूसरा- इसके तहत कोई लाभ होना चाहिए और तीसरा यह सरकार के अधीन होना चाहिए. अगर यह है, तो वह ऑफिस ऑफ प्रॉफिट होगा. मामला न्यायालय में विचाराधीन है. हालांकि, यह मामला चुनाव आयोग व झारखंड हाइकोर्ट में है. इस मामले में उन्हें ही निर्णय लेना है.

राज्यपाल के पास ओपिनियन भेजेगा चुनाव आयोग 

सुभाष कश्यप यदि कोई सदस्य ऑफिस ऑफ प्रॉफिट करता है, तो वह सदस्यता से अयोग्य घोषित हो सकता है. जहां तक हेमंत सोरेन द्वारा अपने नाम से माइनिंग लीज लेने का मामला है, तो यह देखना होगा कि लीज से किसको लाभ हो रहा है. लाभ लिया गया है या नहीं. बिना दस्तावेज देखे, स्पष्ट रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता है. चुनाव आयोग किसी सदस्य को सीधे अयोग्य घोषित नहीं कर सकता है. नियम है कि राज्यपाल चुनाव आयोग को भेजते हैं. आयोग जांच कर सुप्रीम कोर्ट को ओपिनियन के लिए भेजेगा. सुप्रीम कोर्ट का ओपिनियन मिलने पर आयोग उसे राज्यपाल के पास भेजेगा.

Tags: CM Hemant Soren, Jharkhand news, Ranchi news

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