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हेमंत सोरेन फिर चुने गये जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष, शिबू सोरेन अध्यक्ष, पार्टी संगठन में कई परिवर्तन

हेमंत सोरेन फिर चुने गये जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष, शिबू सोरेन अध्यक्ष, पार्टी संगठन में कई परिवर्तन

जेएमएम ने अपने राजनीतिक प्रस्ताव में बीजेपी पर कृषि कानून समेत कई मुद्दों पर निशाना साधा

जेएमएम ने अपने राजनीतिक प्रस्ताव में बीजेपी पर कृषि कानून समेत कई मुद्दों पर निशाना साधा

JMM Conference: जेएमएम महाअधिवेशन में कई राजनीतिक प्रस्ताव पेश किये गये, जिन्हें सर्वसम्मति से पारित किया गया. पार्टी ने अपने राजनीतिक प्रस्ताव में कहा कि वर्ष 2014 में जब केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार स्थापित हुई, तब झारखंडी पहचान एवं अस्तित्व को समाप्त करने की कोशिश हुई.

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रांची. झारखंड मुक्ति मोर्चा यानी जेएमएम का 12वां महाधिवेशन रांची में आयोजित हुआ. इस अधिवेशन में शिबू सोरेन को 10वीं बार पार्टी का अध्यक्ष, जबकि सीएम हेमंत सोरेन को कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया. पार्टी में सांगठनिक तौर पर कई फेरबदल किये गये. सचिव का पद 25 से घटाकर 15 कर दिया गया, वहीं महासचिव का पद 15 से से घटाकर 11 और उपाध्यक्ष 11 से 9 कर दिया गया है.

जेएमएम महाअधिवेशन में कई राजनीतिक प्रस्ताव पेश किये गये, जिन्हें सर्वसम्मति से पारित किया गया. पार्टी ने अपने राजनीतिक प्रस्ताव में कहा कि वर्ष 2014 में जब केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार स्थापित हुई, तब झारखंडी पहचान एवं अस्तित्व को समाप्त करने की कोशिश हुई. इसके बाद राज्य की सवा तीन करोड़ जनता ने भाजपा शासन के खिलाफ झामुमो के उर्जावान नेता हेमंत सोरेन पर विश्वास प्रकट करते हुए नेतृत्व करने का आर्शीवाद दिया. राज्य में 19 वर्षों के बाद पहली बार मूलवासी-आदिवासी सत्ता का संचालन कर रहा है.

राजनीतिक प्रस्ताव में भाजपा पर तीखे प्रहार

-2014 में जब भाजपा सरकार आयी तो पूंजीपतियों के दबाव में यूपीए सरकार की भूमि अधिग्रहण कानून को समाप्त करने का प्रयास किया, मगर जनदबाव में वापस लेना पड़ा.
-दोबारा 2019 में सत्ता आयी तो पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने एवं उनके इशारे पर तीन किसान कानून लाया, मगर एक वर्ष के लंबे आंदोलन के बाद यह कानून भी वापस लेना पड़ा.
-अब भी भाजपा मूलवासी-आदिवासियों के सुरक्षा कवच से जुड़े संवैधानिक अधिकार एवं कानूनों पर गिद्ध नजर बनाए हुए है. वनाधिकार, कश्तकारी अधिनियम को समूल नाश की योजना बना रही है.
-केंद्र सरकार बैंक बेचना, बीमा सेक्टर बेचना, रेलवे स्टेशन बेचना, वायु सेवा बेचना, हवाई अड़डा बेचना, भेल बेचना, गेल कंपनी बेचना, सेल कंपनी बेचना, कोल कंपनी बेचना सहित सभी तरह के सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के कंपनियों एवं संस्थानों को बेचेने पर अमादा है.
-मंहगाई की मार-अबकी बार मोदी सरकार का नारा देकर 2014 में सत्ता में आयी भाजपा के काल में मंहगाई सारे हदें पार कर दी हैं.
-केंद्रीय एजेंसियों पर दबाव बनाकर मनमाना कानून देश की जनता पर लादा जा रहा है
-जेएसटी के नाम पर राज्यों के हाथों कटोरा थमा दिया गया, भीखमंगई की स्थिति पैदा कर दी
-2019 में राज्य की निरकुंश भाजपा सरकार को जनता ने उखाड़ फेंका और हेमंत सोरेन को बागडोर सौंपा
-एक चुनी हुई सरकार को अस्थिर करना और वहां जनहित के खिलाफ अपनी सरकार की स्थापना करना भाजपा की आदत बन गयी है, 23 मार्च को मध्य प्रदेश की चुनी सरकार को अपदस्त करना ताजा उदाहरण है.
-कोरोना काल में केंद्र सरकार के गलत नीतियों के कारण स्थिति बिगड़ी और देश की जनता को भाजपा ने संकट में डाला
-2020 में विपत्ति काल में भी मुनाफा कमाने के लिए कई लाख मिट्रिक टन ऑक्सिजन बेचे और जीवन रक्षक दवाएं बेचीं.

Tags: CM Hemant Soren, Jharkhand mukti morcha, Shibu soren

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