यहां पहली पीढ़ी के बच्चे ही स्कूल में पढ़ाई करने आ रहे हैं
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यहां पहली पीढ़ी के बच्चे ही स्कूल में पढ़ाई करने आ रहे हैं
बदहाल शिक्षा व्यवस्था

शिक्षकों से शिक्षक का काम नहीं लिया जा रहा है.

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राजधानी रांची के कई सरकारी विद्यालयों के वजूद पर सवाल उठ रहे हैं. इन विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों की न तो दशा बेहतर है और न ही उनकी शिक्षा गुणवत्तापूर्ण है. जब न्यूज18 / ई टीवी की टीम ने ऐसे ही एक विद्यालय का दौरा किया तो हैरंतअंगेज़ सच्चाई जानने को मिली.

राजधानी रांची के चर्च रोड स्थित एक ही कैम्पस में दो विद्यालय स्थापित हैं. एक है उर्दू मध्य विद्यालय और दूसरा है हिंदी विद्यालय. इन विद्यालयों में अध्ययनरत अधिकतर बच्चे स्कूल यूनिफार्म के बजाए गंदे कपड़ों में दिखे. हैरत तो तब हुई जब आठवीं कक्षा के बच्चों से बेहद हल्के सवाल पूछे गए और वे उनका जवाब भी नहीं दे सके.

इतना ही नहीं इन दोनों विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या शिक्षकों की संख्या के अनुपात में काफी कम है. उर्दू विद्यालय में दो सौ विद्यार्थियों पर पांच शिक्षक हैं जबकि हिंदी विद्यालयों में एक सौ विद्यार्थियों पर आठ शिक्षक हैं. शिक्षक इकबाल ने कहा कि स्कूल में पढ़ने के अलावा बच्चों के माता-पिता को घर भी अपने बच्चों को पढ़ाना चाहिए. ऐसे माहौल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का तो सवाल ही नहीं उठता.



दूसरी तरफ छात्र नेता शिक्षकों को प्रशिक्षित करने पर ज़ोर दे रहे हैं. छात्र नेता शमीम अली ने कहा कि शिक्षकों से शिक्षक का काम नहीं लिया जा रहा है. उन्हें मध्याह्न भोजन बनाने, रजिस्टर में एंट्री करने इत्यादि कामों में ही लगा दिया जा रहा है. इस वजह से भी स्कूल में नियमित पढ़ाई नहीं हो पाती है.



इन विद्यालयों में पाबंदी के साथ मध्याह्न भोजन की व्यवस्था है. इन विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के परिजनों की मानें तो वे अपने बच्चों को सिर्फ खाने के लिए विद्यालय भेजते हैं. बहरहाल इन मामलों में ज़िला शिक्षा पदाधिकारी रतन कुमार महवार ने कहा कि स्लम एरीया में जो सर्वे किया गया उससे यही पता चला कि पहली पीढ़ी के बच्चे ही स्कूल  में पढ़ाई करने आ रहे हैं. इन बच्चों के माता-पिता पढ़े हुए नहीं हैं. संभवत: उन्हें शिक्षा की इतनी समझ नहीं थी. उन्होंने कहा कि स्लम क्षेत्र के लोगों को अभी भी शिक्षा के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है.

केंद्र और राज्य सरकार द्वारा समाज को पूर्ण रूप से शिक्षित करने के उद्देश्य से योजनाएं चलाई जा रही हैं. साथ ही समाजी संस्थाओं द्वारा इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं. बावजूद इसके अभी भी इस क्षेत्र में सुदृढ़ प्रयास करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है.
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