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झारखंड: साइकिल पर फल-फूल रहा करोड़ों का काला कारोबार, 100 रुपये में मैनेज होती है पुलिस!

रांची-रामगढ़ एनएच-33 पर ये रोज का नजारा है. साइकिलों पर इसी तरह से कोयले का काला कारोबार चलता है.

रांची-रामगढ़ एनएच-33 पर ये रोज का नजारा है. साइकिलों पर इसी तरह से कोयले का काला कारोबार चलता है.

Illegal Coal Mining Racket: रामगढ़- रांची NH-33 पर सरपट दौड़ती गाड़ियों के बीच साइकिल पर धड़ल्ले से जारी कोयले के अवैध कारोबार का नजारा आपको रोज देखने को मिल जाएगा.

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रांची. झारखंड में कोयले का काला कारोबार (Illegal Coal Mining Racket) बदस्तूर जारी है. रामगढ़ टू रांची हाईवे इस काले कारोबार का कॉरिडोर बना हुआ है. हर दिन 500 से ज्यादा साइकिल के सहारे कोयले का ये अवैध कारोबार फल-फूल रहा है. मजेदार बात ये है कि इस कारोबार में पुलिस (Ranchi Police) की अहम भूमिका है. बगैर घूस के एक भी साइकिल का रांची में प्रवेश नामुमकिन है.

रामगढ़- रांची NH-33 पर सरपट दौड़ती गाड़ियों के बीच साइकिल पर धड़ल्ले से जारी कोयले के अवैध कारोबार का नजारा आपको रोज देखने को मिल जाएगा. दिनभर में 500 से अधिक साइकिल और 200 के करीब मोटरसाइकिल कोयले की अवैध ढुलाई में लगे रहते हैं. एक साइकिल पर 15 से 30 बोरी कोयले की ढुलाई की जाती है. वजन में बात करें तो 2 क्विंटल कोयला लदा होता है. इन बोरियों को रांची में लाकर बेचा जाता है. जहां 15 बोरी कोयले की कीमत 2 हजार रुपये और 30 बोरी के लिए 3500 रुपये मिल जाते हैं.

कोयले के इस अवैध कारोबार में शामिल एक साइकिलवाले ने बताया कि उनसे हाईवे के किनारे स्थित बड़े होटलवाले कोयला खरीदते हैं. होटलवाले ट्रकों के सहारे दूसरे राज्यों में कोयला भेजते हैं. प्रति साइकिल पुलिस को सौ रुपया पहुंचाया जाता है.

कोयले का ये अवैध कारोबार कुछ इस तरह से चलता है. पहला ग्रुप बंद खदान से कोयले के अवैध उत्खनन करते हैं. दूसरा, इस कोयले को कच्चा से पोड़ा बनाने का काम करता है. तीसरा, तैयार कोयला को साइकिल और मोटरसाइकिल के सहारे होटलों तक पहुंचाता है. चौथा ग्रुप कोयले के इस कारोबार में दलाली करता है, यानी खुद की हिस्सेदारी के साथ-साथ पुलिस को मैनेज करता है.

रामगढ़ के रजरप्पा और कुज्जू से कोयले की ये छोटी-छोटी खेप रांची के बाजारों में पहुंचती है. बीच में पड़ने वाली 7 किमी लंबी रामगढ़ घाटी में कोयले लदे साइकिल को मोटरसाइकिल से टोचन कर घाटी पार कराया जाता है. इसके लिए मोटरसाइकिल वालों को तय रकम दी जाती है.

झारखंड में सरकार चाहे किसी की भी हो, लेकिन कोयले का ये कारोबार कभी बंद नहीं होता. कभी-कभी ऊपर के दबाव के चलते कारोबार का तरीका बदलना पड़ता है. लेकिन सालों से जारी ये अवैध कारोबार कभी रुकता नहीं है.

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