झारखंड: 100 रुपये में थाना सेट! और धड़ल्ले से जारी है लाखों के बालू का खेल

रांची में बालू का अवैध कारोबार और बिक्री धड़ल्ले से जारी है.

रांची में बालू का अवैध कारोबार और बिक्री धड़ल्ले से जारी है.

Illegal Sand: ट्रैक्टर चालकों ने साफ कहा कि बालू उठाव से लेकर राजधानी रांची पहुंचने तक उन्हें कई थानों और पीसीआर वैन की जेब गर्म करनी पड़ती है. सभी का रेट फिक्स है.

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रांची. झारखंड सरकार (Jharkhand Govt) भले ही अब तक बालू नीति नहीं बना पाई हो, लेकिन राजधानी रांची में बालू (Sand) का अवैध कारोबार और बिक्री धड़ल्ले से जारी है. हर दिन अहले सुबह राजधानी के एनएच से सटे इलाकों में ट्रैक्टर और दूसरे वाहनों के जरिए बालू को बेचकर राजस्व को चूना लगाया जा रहा है. न्यूज़- 18 की पड़ताल में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए.

ट्रैक्टर चालकों ने साफ कहा कि बालू उठाव से लेकर राजधानी पहुंचने तक उन्हें कई थानों और पीसीआर वैन की जेब गर्म करनी पड़ती है. सभी का रेट फिक्स है. इसमें हर ट्रैक्टर पर चान्हो थाना का जहां 100 रुपये वहीं मांडर थाना का 50 रुपये और पीसीआर वैन का रेट भी बंधा हुआ है.

सबसे बड़ी बात यह है कि जिन नदी घाटों से बालू का उठाव हो रहा है, वहां भी सब कुछ बालू माफिया और प्रशासन की मिलीभगत से मैनेज्ड है. चान्हों से बालू लेकर पहुंचने वाले ट्रैक्टर चालक सुधन महतो ने बताया कि बिना पैसे दिए ट्रैक्टर को रांची की तरफ बढ़ने नहीं दिया जाता. रांची पहुंचने से पहले हर थाना और मोबाइल पीसीआर वैन को चढ़ावा देने के बाद ही बालू रांची पहुंच पाता है.

हालांकि इन गरीब ट्रैक्टर चालक और मजदूरों को यह पता नहीं कि बालू नीति नहीं बन पाने की वजह से बालू का इस तरह लाकर बेचना गैर कानूनी है.
वहीं बालू ब्रोकर विश्वनाथ चौधरी लगातार थाने को पैसे देने की बात से इनकार करता रहा. लेकिन उनकी मौजूदगी में ही तमाम ट्रैक्टर चालकों ने कानून व्यवस्था की पोल पट्टी खोलकर रख दी.

राजधानी रांची में इन दिनों चान्हो, सिलागाई और हिंदगीर छापर नदी घाटों का बालू बेचा जा रहा है. रोजाना सुबह 4 बजे से ही बुढ़मू और ठाकुरगांव से बालू लदे ट्रैक्टरों का रांची पहुंचना शुरू हो जाता है. सभी ट्रैक्टर चालक पिस्का मोड़ के पास अपने वाहन को खड़ा कर देते हैं. जहां खरीदार पहुंचकर उनसे बालू का मोलभाव तय करते हैं. और फिर ट्रैक्टर अनलोड के लिए गंतव्य की ओर रवाना हो जाता है.

बालू का यह अवैध कारोबार और बिक्री सुबह 4 बजे से शुरू होकर 6.30 बजे तक खत्म हो जाता है. उसके बाद ट्रैक्टर उसी रास्ते से वापस चले जाते हैं.



आपको बता दें कि बजट सत्र के दौरान सीएम हेमंत सोरेन ने राज्य में बालू नीति जल्द बनाने का भरोसा दिया था. और बताया था कि पोर्टल के जरिए जरूरतमंद लोग बालू की ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे. यानी बालू की बिक्री ऑनलाइन होगी. लेकिन अभी तक ऐसी कोई ठोस नीति सामने नजर नहीं आ रही. और प्रशासन की नाक के नीचे बालू का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है.

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