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झारखंड में 'ब्याज घोटाला', सरकार के करोड़ों रुपये शातिर तरीके से डकार गये इंजीनियर्स

झारखंड में 'ब्याज घोटाला', सरकार के करोड़ों रुपये शातिर तरीके से डकार गये इंजीनियर्स

झारखंड में सरकार के करोड़ों रुपये इंजीनियर्स डकार गये. (सांकेतिक तस्वीर)

झारखंड में सरकार के करोड़ों रुपये इंजीनियर्स डकार गये. (सांकेतिक तस्वीर)

Jharkhand News: घोटाले का खुलासा सीएचसी तमाड़, सीएचसी मुरहू और अनुमंडलीय अस्पताल बुंड के निर्माण के दौरान सामने आयी. इसके निर्माण की जिम्मेदारी सहायक इंजीनियर कृष्णचंद्र सिंह पर थी. उन्होंने 2007-08 से लेकर 2019 तक कुल 8 करोड़ 86 लाख 60 हजार 602 रुपये की राशि अपने सेविंग एकाउंट में मंगायी. लेकिन लाखों में होने वाले इस रकम के ब्याज को उन्होंने सरकार को वापस नहीं किया, बल्कि खुद डकार गये.

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रांची. स्वास्थ्य सेवाएं आमलोगों के लिए संजीवनी होती है. लेकिन इस संजीवनी के नाम पर आंखों में धूल झोंककर करोड़ों की राशि का बंदरबांट किया जा रहा है. मामला झारखंड में सीएचसी और पीएचसी के निर्माण को लेकर है. नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपये की सरकारी राशि सेविंग एकाउंट में मंगायी गयी. और उसके ब्याज के नाम पर करोड़ों रुपये डकार लिए गये, जबकि ब्याज के ये पैसे सरकार को वापस करने थे. फिलहाल मामला हाईकोर्ट में है.

मामला 2006-07 का है. राज्य में करीब 200 प्रखंडों में सीएचसी और पीएचसी का निर्माण किया जाना था. इसको लेकर विभागीय स्तर पर होने वाले इस निर्माणकार्य की जिम्मेदारी प्रखंड स्तर पर इंजीनियर्स को दी गयी. याचिकाकर्ता अरुण कुमार दूबे ने बताया कि एडवांस के नाम पर करीब 50 फीसदी की राशि इंजीनियर्स के नाम से सेविंग एकाउंट खोलकर उस खाते में मंगा ली गयी. सेविंग एकाउंट में जमा होने वाली करोड़ों की इस राशि पर ब्याज भी लाखों में हो गया. लेकिन ब्याज की इस राशि को इंजीनियर्स पूरी तरह डकार गये. जबकि इस राशि को सरकार को वापस लौटायी जानी थी.

दरअसल पूरे मामले का खुलासा सीएचसी तमाड़, सीएचसी मुरहू और अनुमंडलीय अस्पताल बुंड के निर्माण के दौरान सामने आयी. इसके निर्माण की जिम्मेदारी सहायक इंजीनियर कृष्णचंद्र सिंह पर थी. उन्होंने 2007-08 से लेकर 2019 तक कुल 8 करोड़ 86 लाख 60 हजार 602 रुपये की राशि अपने सेविंग एकाउंट में मंगायी. लेकिन लाखों में होने वाले उसके ब्याज को उन्होंने सरकार को वापस नहीं किया. इसको लेकर याचिकाकर्ता अरुण कुमार दूबे ने  झारखंड हाईकोर्ट में 3 जुलाई 2019 को एक याचिका दाखिल की. हाईकोर्ट में दायर की गयी जनहित याचिका में सेविंग एकाउंट में पैसे मंगाने को ही आधार बनाया गया है.

याचिकाकर्ता अरुण कुमार दूबे ने बताया कि सरकारी निर्माण कार्य के लिए आमतौर पर निविदा निकाली जाती है. लेकिन विधायक, सांसद निधि फंड और विभागीय कार्य के माध्यम से भी इंजीनियर्स को एडवांस देकर कार्य कराये जाते हैं. इसके पीछे दलील यह दी जाती है कि निविदा के माध्यम से काम कराने पर नियमानुसार ठेकेदार को दिये जाने वाले 9.1 फीसदी लाभांश में बचत मिलेगी. लेकिन यहां भी नियम के अनुसार बैंक में करंट एकाउंट खोले जाते हैं न कि सेविंग एकाउंट. अगर किसी मामले में सेविंग एकाउंट खोला भी जाता है तो उसमें आने वाली ब्याज की राशि सरकार को वापस करने का नियम है. लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं किया गया. यहां सेविंग एकाउंट में आने वाले ब्याज के नाम पर लाखों रुपये की हेराफेरी तो हुई ही, साथ ही कॉन्ट्रेक्टर लाभांश के नाम पर पैसे उड़ा लिए गये.

15 मई 2009 को तमाड़, मुरहू और बुंडू में पैसों की बंदरबांट का मामला सामने आने के बाद तत्कालीन राज्यपाल केशंकर नारायण के सलाहकार सुशीला बसंत ने उस समय मामले की जांच के आदेश भी दिए थे. और दोषी अभियंताओं पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे. लेकिन जांच़ के नाम पर महज खानापूर्ति कर मामले को निपटा दिया गया.

अधिवक्ता राजीव कुमार ने बताया कि तमाड़, मुरहू और बुंडू का मामला सिर्फ एक नमूना है. राज्यभर के करीब 200 प्रखंडों में पीएचसी और सीएचसी का निर्माण होना था. ऐसे में सभी जगहों की जांच अगर करायी गयी तो मामला कितने करोड़ का पहुंचेगा, ये सोचने की बात है.

आपको बता दें कि 2006-07 में एक सीएचसी के निर्माण की लागत करीब 2 करोड़ 81 लाख 36 हजार 695 रुपये थी, जो 2015-16 में बढ़कर 5 करोड़ 58 लाख 61 हजार के करीब हो गयी. ऐसे में सिर्फ ब्याज के नाम पर ही 100 करोड़ से ऊपर के घोटाला की बात सामने आ रही है. फिलहाल इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट में अबतक तीन सुनवाई हो चुकी है. जल्द ही इस मामले में जांच को लेकर कोई बड़ा फैसला आने की उम्मीद है.

Tags: Jharkhand news, Scam

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