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देश को 3 गोल्ड देने वाली अंतरराष्ट्रीय पावर लिफ्टर की दयनीय हालत, सरकार से मांग रही नौकरी

देश को 3 गोल्ड देने वाली अंतरराष्ट्रीय पावर लिफ्टर की दयनीय हालत, सरकार से मांग रही नौकरी

हेमा वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप-2020 में 3 गोल्ड मेडल जीती थी.

हेमा वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप-2020 में 3 गोल्ड मेडल जीती थी.

Jharkhand Sports: अंतरराष्ट्रीय पावर लिफ्टर हेमा कुमारी के पिता प्राइवेट नौकरी करते हैं. ऐसे में पिता के लिए बेटी को खेल में आगे बढ़ाना चुनौती साबित हो रही है. हेमा ने बताया कि पावर लिफ्टिंग के लिए खुराक काफी अच्छी होनी चाहिए. इसमें उसे मुश्किलें आ रही हैं.

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रांची. हॉकी, आर्चरी और फुटबॉल के साथ- साथ झारखंड का नाम पावर लिफ्टिंग में भी तेजी से उभर रहा है. देश के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी झारखंड के पावर लिफ्टर खिलाड़ियों ने अपनी साख बनायी है. इसी कड़ी में एक नाम रांची की हेमा कुमारी का भी है. 21 वर्षीय हेमा 64 किलोग्राम में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड जीत चुकी है. हेमा की उपलब्धियों की बात करें तो अब तक कई खिताब, मेडल और कप उसकी सफलता की कहानी कह रही है.

हेमा ने अंतर्राष्टरीय स्तर पर तीन गोल्ड मेडल जीते हैं. इसमें 2020 में वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड शामिल है. इस चैंपियनशिप की तीन स्पर्धा, जिसमें फुल पावर लिफ्टिंग, बेंच प्रेस और डेडलिफ्ट तीनों में हेमा ने गोल्ड मेडल जीते.

हेमा की उपलब्धियां
* 2020 में वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 3 गोल्ड
* 2021 में Best powerlifter of India में गोल्ड
* नवंबर 2021 में ईस्टर्न स्ट्रांगेस्ट बेस्ट पावर लिफ्टिंग का खिताब
* 2020-21 में स्ट्रांगेस्ट वीमेन आफ झारखंड का खिताब/गोल्ड

हेमा की माने तो उसकी ताकत और क्षमता को उसके पिता के अलावा उसके कोच अशोक गुप्ता ने पहचाना था. इसके बाद उसने 19 वर्ष की उम्र में आधिकारिक रूप से पावर लिफ्टिंग की शुरुआत की और महज दो साल में ही अपनी पहचान राज्य से लेकर अंतर्राष्ट्रीय तक बना ली.

हेमा दो बहन और एक भाई है. पिता प्राइवेट नौकरी करते हैं. ऐसे में पिता के सामने हेमा को खेल में आगे बढ़ाना चुनौती साबित हो रही है. हेमा ने बताया कि पावर लिफ्टिंग के लिए खुराक काफी अच्छी होनी चाहिए. प्रोटीन और बिटामिन युक्त भोजन के साथ-साथ हेल्ड ड्रिंक और पोषक डायट की बेहद जरूरत होती है. इसमें उसे मुश्किलें आ रही हैं.

हेमा ने बताया कि उसके पदकों की संख्या और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अबतक की सफलता को देखते हुए राज्य सरकार से उसे एक नौकरी का इंतजार है. 21 साल की इस पावर लिफ्टर ने बताया कि नौकरी मिलने के बाद खेल को लेकर उसकी उड़ान में और मजबूती मिलेगी.

हेमा के कोच अशोक गुप्ता खुद भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पावर लिफ्टर रह चुके हैं. उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों को खेल के लिए अक्सर बाहर जाना पड़ता है. लिहाजा दूसरे खेलों की तरह ही राज्य सरकार को पावर लिफ्टिंग को भी बढ़ावा देना चाहिए. और दूसरे प्रदेशों और विदेशों में होने वाले टूर्नामेंट और चैंपियनशिप के लिए खिलाड़ियों का खर्च उठाना चाहिए. कोच ने बताया कि खिलाड़ी अपने पैसे से इस खेल में बहुत दूर नहीं जा सकते, क्योंकि उनके सामने कई तरह की परेशानियां आती हैं.

Tags: Jharkhand news, Ranchi news, Sports

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