सीएजी रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता उजागर

Bhuvan Kishor Jha | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: August 12, 2017, 6:54 PM IST
सीएजी रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता उजागर
सीएजी रिपोर्ट में राज्य में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता उजागर हुई है. झारखंड सरकार की अनियोजित बजट के कारण सरकारी राशि की न केवल क्षति हुई है बल्कि एसी, डीसी बिल के तहत 2000 से 2016 तक का करीब 5,471 करोड़ के खर्च का अब तक कोई हिसाब सरकार के पास नहीं है.
Bhuvan Kishor Jha | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: August 12, 2017, 6:54 PM IST
सीएजी रिपोर्ट में राज्य में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता उजागर हुई है. झारखंड सरकार की अनियोजित बजट के कारण सरकारी राशि की न केवल क्षति हुई है बल्कि एसी, डीसी बिल के तहत 2000 से 2016 तक का करीब 5,471 करोड़ के खर्च का अब तक कोई हिसाब सरकार के पास नहीं है. वहीं धान क्रय के नाम पर भी जमकर राशि का दुरुपयोग होने की बात सामने आई है.

झारखंड गठन से अब तक एसी,डीसी के नाम पर निकासी की गई करीब 5471 करोड़ की राशि कहां खर्च हुई है इसका पता राज्य सरकार को नहीं है. सीएजी द्वारा आज विधानसभा पटल में रखी गई रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. वित्त,सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, सामान्य, सामाजिक एवं आर्थिक प्रक्षेत्रों और स्थानीय निकायों के ऊपर सौंपी गई सीएजी की रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर अनियमितता दर्शायी गई है. 2011 से 2013 के दौरान जहां धान क्रय के दौरान बिचौलियों के सहयोग से सरकारी राजस्व की क्षति होने की बात सामने आई है वहीं 2013-15 के दौरान धानक्रय सरकार द्वारा नहीं हो सका.

इतना ही नहीं सुरक्षा संबंधित व्यय में राज्य सरकार केन्द्र से गोला बारुद खरीदने के लिए 5.98 करोड़ पाने में विफल रही. 2014-15 की तुलना में विकासात्मक राजस्व व्यय की वृद्धि दर 55 प्रतिशत से घटकर 2015-16 में 47 प्रतिशत हो गई. औद्योगिक विकास के लिए राज्य गठन से अब तक हुए 79 एमओयू में से 38 एमयोयू रद्द हो गए. वहीं 2014-15 में 20.8 प्रतिशत की अपेक्षा 2015-16 में राजस्व प्राप्ति करीब 28.7 फीसदी रही जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 8 प्रतिशत अधिक रहा.

हेल्थ और पावर सेक्टर में भी चल रहे विकास योजनाएं कारगर साबित नहीं हुई हैं. सीएजी ने रिपोर्ट में जहां स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के कारण लोगों को हो रही परेशानी पर आपत्ति जताई है वहीं उपकरण खरीद पर करोड़ों खर्च होने के बाद भी उनके बेकार पड़े रहने पर सरकारी राशि की क्षति बताई.
First published: August 12, 2017
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