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सरेंडर के बाद इनामी नक्सली की आपबीती- बहन के साथ रेप और हत्या का बदला लेने को उठाई बंदूक

इनामी नक्सली जीवन कंडुलना ने रविवार को रांची पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया.

इनामी नक्सली जीवन कंडुलना ने रविवार को रांची पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया.

Naxal Commander Surrender: रांची में कुख्यात नक्सली जीवन कंडुलना ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के बाद खोले अपने राज. बहन के साथ दुष्कर्म-हत्या मां का अंतिम दर्शन न करने जैसे दुखों की कहानी बताई.

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रांची. झारखंड पुलिस (Jharkhand Police) के लिए सिरदर्द रहे नक्सली कमांडर जीवन कंडुलना को सरेंडर (Surrender) के बाद रविवार को जेल भेज दिया गया. जेल जाने से पहले पूछताछ में कंडुलना ने कई खुलासे किये. उसने बताया कि उसकी बहन की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी. इस वजह से वह नक्सली संगठन में शामिल हुआ. और हार्डकोर नक्सली बन गया. वह नक्सली दस्ते में लगातार सक्रिय रहकर जोनल कमांडर बना. लेकिन संगठन में रहते हुए उसने कई कीमती चीजें खोई भी हैं.

कंडुलना ने बताया कि अपने जीवन में उसे कई दुखों को सहना पड़ा. मां की कैंसर से मौत हो गई. लेकिन वह मां का अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाया. यहां तक कि मां के इलाज में भी कोई सहयोग नहीं कर पाया. यह सब सोच कर उसने संगठन छोड़ने का निर्णय लिया. और पुलिस के सामने हथियार डाल दिया.

10 लाख का इनामी नक्सली जीवन कंडुलना 80 से अधिक मामलों में वांटेड था. कंडुलना खूंटी जिले के रनिया थाना क्षेत्र के जापुद (जयपुर) गांव का रहने वाला है. उसने बताया कि उसकी बहन कॉलेज में पढ़ती थी. एक जनवरी 2009 को उसके ही गांव के ही तीन-चार लड़कों ने मिलकर उसकी बहन के साथ दुष्कर्म किया, फिर उसकी हत्या कर दी थी. इस दौरान वह पंजाब के जालंधर में मजदूरी कर रहा था. घटना की जानकारी मिलने के बाद वह जालंधर से घर लौटा आया था.



गांव में रहने के दौरान कंडुलना का नक्सली निर्मल और प्रसाद जी उर्फ कृष्ण अहीर से संपर्क हुआ. इसके बाद वह 2009 में निर्मल के दस्ते में शामिल हो गया. कुछ दिनों बाद बहन से दुष्कर्म की घटना में शामिल मध्यम कुमार और राज किशोर की हत्या कर बदला लिया. घटना में शामिल दो अन्य लड़के गांव छोड़कर भाग गए थे.
साल 2010 से लेकर 2012 तक कंडुलना निर्मल के दस्ता में सक्रिय रहा. साल 2012 में उसे एसएलआर हथियार दिया गया. निर्मल के गिरफ्तार होने के बाद वह कृष्णा अहीर के दस्ते में शामिल हो गया. इसके बाद माओवादी संगठन में सक्रिय होकर एक के बाद एक कई बड़ी घटनाओं का अंजाम दिया.
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