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Jharkhand Assembly: बजट सत्र में बीजेपी के हंगामा पॉलिटिक्स का क्या है राज, पढ़ें

बीजेपी विधायकों के हंगामे के चलते सदन ठीक से नहीं चल पा रहा है.

बीजेपी विधायकों के हंगामे के चलते सदन ठीक से नहीं चल पा रहा है.

Jharkhand Assembly: सदन के अंदर इस वक्त नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी खाली है और इस खाली कुर्सी ने बीजेपी के कुछ विधायकों को सदन में अपनी राजनीति चमकाने का मौका दे दिया है.

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रांची. झारखंड विधानसभा (Jharkhand Assembly) के बजट सत्र (Budget Session) में मुख्य विपक्षी दल बीजेपी सरकार के खिलाफ हमलावर है. हर दिन सदन के अंदर बीजेपी विधायकों के तेवर इसके उदाहरण हैं. सदन के अंदर नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी खाली है और इस खाली कुर्सी ने सदन के अंदर बीजेपी के कुछ विधायकों को खुद की राजनीति चमकाने का मौका दे दिया है.

नियोजन नीति से लेकर गिरती कानून व्यवस्था के मुद्दे पर बीजेपी के विधायक सत्ता पक्ष को घेरने में लगे हुए हैं. बात चाहे सदन के अंदर की हो या बाहर की, बीजेपी के इस हंगामा पॉलिटिक्स में राजनीति का एक राज छुपा हुआ है. ये राज है मुद्दे पर खुद मुखर होकर राजनीति चमकाने का. दरअसल सदन के अंदर इस वक्त नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी खाली है और इस खाली कुर्सी ने बीजेपी के कुछ विधायकों को सदन में अपनी राजनीति चमकाने का मौका दे दिया है.

बीजेपी की तरफ से पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग लगातार उठती रही है, पर इस बार ये मांग भी हंगामा पॉलिटिक्स की शोर में गुम हो गयी है. वैसे बीजेपी इस मुद्दे को सरकार की साजिश मानकर दबाव बनाने में जरूर जुटी हुई है.



बजट सत्र के दौरान सदन के अंदर या बाहर की तस्वीरों को आप गौर से देखें तो इसके मायने और मतलब का अंदाजा आपको खुद ब खुद हो जाएगा. सदन के बाहर 5 दिनों के प्रदर्शन में 25 सदस्यों वाली बीजेपी की मजबूती एक भी दिन देखने को नहीं मिली. वही अगर सदन के अंदर की बात करे तो भानु प्रताप शाही, अमर बाउरी, रणधीर सिंह जैसे विधायकों, जो दूसरे दलों के रास्ते बीजेपी तक पहुंचे हैं, वे ज्यादा मुखर या विपक्षी खेमे को लीड करते हुये दिखाई दे रहे हैं. वहीं नीलकंठ सिंह मुंडा, सीपी सिंह, रामचंद्र चंद्रवंशी जैसे वरिष्ठ विधायकों में शालीनता दिखीं. बाबूलाल मरांडी की स्थिति तो सदन में दर्शक की भूमिका से ज्यादा कुछ भी नहीं है, क्योंकि ना तो उन्हें बोलने मौका मिला और ना ही इस बार उनके तरफ से कोई प्रयास ही दिखा.
बजट सत्र में मुख्य विपक्षी दल बीजेपी की मौजूदा भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चा हो रही है. बीजेपी राज्य सरकार के खिलाफ सदन में जितना ज्यादा शोर मचा रही है, शायद उसके खेमे में श्रेय लेने की बेचैनी उससे कही ज्यादा है. मुख्य सचेतक विरंची नारायण के सर्वमान्यता को लेकर भी बीजेपी के अंदर खाने खिचड़ी पक रही है, जिसका फलाफल क्या होगा ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा.
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