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Jharkhand Assembly: पत्थलगड़ी के मुद्दे पर अपनी ही सरकार से नाराज हैं सत्तापक्ष के विधायक, की ये मांग

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में विपक्ष का हंगामा जारी है.

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में विपक्ष का हंगामा जारी है.

Jharkhand Assembly Budget Session: सत्तापक्ष के विधायक पत्थलगड़ी के सिलसिले में राज्यभर में दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांंग कर रहे हैं.

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रांची. झारखंड विधानसभा (Jharkhand Assembly) के बजट सत्र (Budget Session) में विपक्ष का हंगामा जारी है. सोमवार को भी सदन के अंदर जहां बीजेपी विधायकों ने बिजली बिल के मुद्दे पर सरकार पर हमला बोला, वहीं सत्तापक्ष के विधायकों ने पत्थलगड़ी, डायन-बिसाही, विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग के मुद्दे पर सरकार को कठघरे खड़ा किया. हालांकि इस दौरान बीजेपी के विधायक काफी देर तक वेल में डटे रहे और नारेबाजी करते रहे.

बजट सत्र के 7 वें दिन भी सदन के अंदर विपक्ष और सत्तापक्ष के विधायकों ने सरकार को घेरने की पुरजोर कोशिश की. एक तरफ जहां बीजेपी के विधायकों ने सदन के बाहर और अंदर बिजली बिल के मुद्दे पर सरकार को घेरा, वहीं दूसरी तरफ सरकार को समर्थन दे रहे विधायकों के तेवर भी तल्ख दिखे. बीजेपी विधायकों की ओर से बिजली बिल को लेकर लाया गया कार्य स्थगन प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष ने अमान्य करार दे दिया. इससे नाराज विधायक काफी देर तक वेल में हंगामा करते रहे.

बीजेपी विधायकों के इस सवाल पर माले विधायक विनोद सिंह ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ सरकार कहती है कि इस पर विचार कर रही है, वहीं दूसरी तरफ लोगों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं.



सदन में सत्ता पक्ष की ओर से पत्थलगड़ी के मामले में मुकदमा वापस लेने, डायन- बिसाही के बढ़ते मामलों पर रोक लगाने और विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग के गठन पर सरकार को घेरने की कोशिश की गई. सदन के अंदर काफी देर तक बंधु तिर्की HEC के मुद्दे पर सरकार को आइना दिखाते नजर आए. उनका कहना था कि पहले 32 गांव के लोग विस्थापित हुए, फिर उन्हें 10 से 15 डिसमिल जमीन दी गई, पर आज तक जमीन का पट्टा नहीं मिलने से उनके बच्चों का जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार विस्थापितों के लिये गंभीर है और चाहे आयोग बनाने की बात हो या इससे कोई बेहतर विकल्प की, राज्य सरकार जरूर निर्णय लेगी.

सदन में साल 2024 तक हर घर नल से जल के मुद्दे पर भी बीजेपी ने विभाग पर सवाल उठाये. राज्य में अब तक मात्र 10 प्रतिशत घरों तक नल से जल की रफ्तार को बढ़ाने की नसीहत भी सरकार को दी गई. हालांकि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने माना कि वो अपने लक्ष्य को हासिल करने में जरूर कामयाब होगा.
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