झारखंड में 'मिशन 65' का लक्ष्य हासिल करने के लिए होमवर्क पूरा करने में जुटी BJP
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झारखंड में 'मिशन 65' का लक्ष्य हासिल करने के लिए होमवर्क पूरा करने में जुटी BJP
आगामी झारखंड विधानसभा चुनाव को देखते हुए सत्ताधारी बीजेपी का जोर किसानों की बेहतरी को लेकर है (फाइल फोटो)

मुख्यमंत्री रघुवर दास जानते हैं कि पार्टी के असली ट्रम्प कार्ड पीएम मोदी ही हैं. तभी वो अपनी हर सभा में मोदी सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा देते फिर रहे हैं.

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  • Last Updated: September 28, 2019, 3:45 PM IST
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नई दिल्ली. झारखंड की विधानसभा (Jharkhand Assembly Election 2019) 5 जनवरी, 2020 तक गठित होनी है. लिहाजा बीजेपी आलाकमान (BJP High Command) ने महाराष्ट्र और हरियाणा (Maharashtra And Haryana) के साथ-साथ चुनाव करवाने के बजाए थोड़ा इंतजार करना बेहतर समझा. आलाकमान जानता है कि झारखंड में होमवर्क पूरा नहीं हुआ है. जिला और बूथ स्तर (Booth Level) पर बहुत कुछ करना बाकी रह गया था. इसलिए उम्मीद है कि अब दीवाली (Diwali) के आस-पास राज्य में चुनाव का ऐलान कर दिया जाएगा.

दरअसल झारखंड में लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी का जादू ऐसा चला कि 'दिशोम गुरु' शिबू सोरेन तक चुनाव हार गए. पीएम मोदी का जादू वोटरों के सिर चढ़ कर बोला था. कमोवेश वही स्थिति इस बार भी है. जामताड़ा से जनादेश यात्रा को हरी झंडी दिखाते हुए अमित शाह ने 'घर-घर रघुवर' का नारा देकर नेतृत्व के सवाल को ही समाप्त कर दिया है.

जनादेश यात्रा में उमड़ती भीड़ देखकर BJP खुश



विधानसभा चुनावों की तैयारियां आलाकमान ने लोकसभा चुनावों के बाद ही शुरू कर दी थी. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर को राज्य का प्रभारी नियुक्त कर दिया गया. माथुर साहब चुनाव लड़ने और लड़वाने के माहिर खिलाड़ी रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्रित्वकाल में ओम माथुर हर विधानसभा चुनाव के प्रभारी रहे. झारखंड पहुंचते ही माथुर लग गए संगठन को दुरुस्त करने में. ब्लॉक से बूथ स्तर की बैठकें शुरू हुईं. सूत्र बताते हैं कि जमीनी स्तर पर काम बहुत बाकी था. संवाद की कमी के कारण बूथ सम्मेलन और जिला स्तर पर बैठकें नही हो पायीं थी. ऐसे में जनादेश यात्रा का कार्यक्रम बनाया गया और इसमें उमड़ती भीड़ देखकर बीजेपी की बांछे खिलती जा रही हैं.
सूत्रों की मानें तो आलाकमान की एक मुश्किल राज्य के सीनियर नेताओं का पूरे मन से चुनावी प्रक्रिया में शामिल नहीं होना है. कड़िया मुंडा और राज्य के कई सांसद अपनी अनदेखी से आहत हैं. वो विरोध में खड़े तो नहीं हुए लेकिन उनकी सक्रिय भागीदारी जीत सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है. इसलिए जनादेश यात्रा जिन जिलों से होकर निकल रही है वहां के सांसद और नेता मंच पर नजर आ रहे हैं. यहां भी आलाकमान को एक ही चिंता है कि इस यात्रा को सोशल मीडिया पर उतनी तवज्जो नहीं मिल रही. इसलिए सीएम रघुवर दास को कहा गया है कि वो सोशल मीडिया पर टीम को दुरुस्त करें ताकि उनकी यात्रा को ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच पहुंचाया जा सके.

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सीएम रघुवर दास अपनी जनादेश यात्रा के दौरान लोगों को कहते हैं कि जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी ने गठबंधन बनाकर झारखण्ड को लूटने का आरोप लगाते हैं


सीटों को लेकर तकरार विपक्ष को एकजुट होने नहीं दे रहा 

हालांकि विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश एक बार फिर जारी है. जेएमएम और कांग्रेस के पास मजबूत वोटबैंक है और आरजेडी इसमें मिल जाये तो एक लड़ाई संभव है. लेकिन सीटों को लेकर तकरार विपक्ष को एकजुट होने नहीं दे रहा है.

संकेत ये भी हैं कि इस बार 16 से 17 मौजूदा विधायकों के टिकट भी काट जा सकते हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में जब पार्टी (बीजेपी) 45 से ज्यादा सीटें जीतने की उम्मीद लगाए बैठी थी तब वो 37 पर सिमट गई थी. सूत्र बताते हैं कि टिकटों का बंटवारा सही नहीं हुआ था. कम से कम 8 से 9 सीटें गलत उम्मीदवारों को दे दी गई थी. जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा था. इसलिए इस बार जीत निश्चित होने पर ही उम्मीदवारी मिलने के आसार हैं. बाहर से बीजेपी में आने वाले नेताओं को भी टिकट की गारंटी नहीं दी जा रही.

झारखंड में BJP के असली ट्रम्प कार्ड पीएम मोदी ही 

मुख्यमंत्री रघुवर दास जानते हैं कि पार्टी के असली ट्रम्प कार्ड पीएम मोदी ही हैं. तभी वो अपनी हर सभा में मोदी सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा देते फिर रहे हैं. पीएम मोदी की छवि राज्य में और निखरी है. 370 और 35 ए की समाप्ति के बाद आलाकमान को लोगों में बीजेपी के पक्ष में लहर नजर आ रही है. और राज्य के हर इलाके में पीएम मोदी की जनसभाएं करवाने की तैयारी में बीजेपी लग गयी है.

अब चुनाव के ऐलान मैं करीब महीने भर का समय बाकी है और बीजेपी तेजी से सारी कमजोर कड़ियों को दुरुस्त करने में लगी है ताकि 'मिशन 65' को मुकाम पर पहुंचाया जा सके.

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