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Jharkhand Assembly Election: संथाल का चुनाव सीएम रघुवर दास और हेमंत सोरेन के लिए अग्निपरीक्षा जैसा

News18 Jharkhand
Updated: December 11, 2019, 2:27 PM IST
Jharkhand Assembly Election: संथाल का चुनाव सीएम रघुवर दास और हेमंत सोरेन के लिए अग्निपरीक्षा जैसा
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने जेएमएममुक्त संथाल का नारा दिया.

साल 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा (BJP) ने संथाल (Santhal) में अच्छा प्रदर्शन किया था. 28 में से 10 सीट जीतने में बीजेपी सफल हुई थी. वहीं जेएमएम (JMM) के खाते में 14 सीटें गई थीं.

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रांची. झारखंड विधानसभा चुनाव (Jharkhand Assembly Elections) के रणक्षेत्र में अब सबकी नजर संथाल क्षेत्र (Santhal) पर टिकी है. संथाल को झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) (JMM) का गढ़ माना जाता है. लेकिन उसमें सेंध लगाने की कोशिश बीजेपी (BJP) लगातार करती रही है. राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास (Raghuvar Das) ने अपने कार्यकाल के दौरान न सिर्फ संथाल का सबसे ज्यादा दौरा किया, बल्कि कई मंचों से इस क्षेत्र के पिछड़ेपन के लिए जेएमएम और सोरेन परिवार को जिम्मेवार बताया. सीएम संथाल को जेएमएममुक्त करने की बात करते रहे हैं. ऐसे में संथाल का चुनाव रघुवर दास और हेमंत सोरेन (Hemant Soren) की राजनीतिक रणनीति का इम्तिहान लेने वाला है.

सीएम रघुवर दास और हेमंत सोरेन के लिए संथाल का चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं. साल 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां अच्छा प्रदर्शन किया था. 28 में से 10 सीट जीतने में बीजेपी सफल हुई थी. वहीं जेएमएम के खाते में 14 सीटें गई थीं. 2014 के चुनाव के बाद भाजपा और खासकर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने संथाल परगना में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी. जेएमएममुक्त संथाल के नारे के साथ सीएम ने अपना पूरा फोकस संथाल के विकास पर रखा.

बीजेपी प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश का दावा है कि संथाल की जनता पिछले पांच साल के कामकाजों का आशीर्वाद बीजेपी को देगी. जनता बीजेपी के पक्ष में फैसला देगी.

2014 के विधानसभा चुनाव में दुमका से हेमंत सोरेन की हार और लोकसभा चुनाव-2019 में दुमका से शिबू सोरेन की अप्रत्याशित हार के बावजूद संथाल को लेकर जेएमएम का इस दावे के पीछे वाजिब कारण हैं. दरअसल राज्य बनने के बाद से संथाल में जेएमएम ने लगातार अपनी सीटें बढ़ाई हैं. वर्ष 2000 में जेएमएम के पास मात्र 6 सीटें थी. यह वर्ष 2005 में 09,वर्ष 2009 में 10 और 2014 में 14 पहुंच गई. संथाल की शिकारीपाड़ा, बरहेट और लिट्टीपाड़ा ऐसी सीटें हैं, जहां जेएमएम अबतक अजेय साबित हुई है.

जेएमएम के प्रदेश प्रवक्ता मनोज पांडेय का कहना है कि भाजपा भले ही जेएमएम मुक्त संथाल का नारा देती रही है, लेकिन संथाल की जनता सोरेन परिवार से प्यार करती है. ऐसे में वे भाजपा के खोखले वादों पर भरोसा नहीं करने वाली है.

संथाल क्षेत्र में चौथे और पांचवें चरण में मतदान होना है. भाजपा और जेएमएम मुकाबले को एकतरफा बनाने में जुटे हैं, तो आजसू और जेवीएम बहुकोणिये बनाने की है. अब संथाल की जनता तय करेगी कि चुनावी कौशल और कुशल रणनीति के मामले में हेमंत सोरेन और रघुवर दास में कौन अव्वल साबित होते हैं.

(रिपोर्ट- उपेन्द्र कुमार)ये भी पढ़ें- मिलिए PM मोदी के इस अनोखे फैन से, झारखंड चुनाव में बीजेपी के लिए मांग रहा वोट

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First published: December 11, 2019, 2:26 PM IST
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