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झारखंड : पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए खरीदी बसें खड़ी-खड़ी सड़ गईं, दोबारा खरीदने की तैयारी शुरू

पब्लिक ट्रांसपोर्ट के नाम पर खरीदी गई बसें खड़े-खड़े सड़ रही हैं.

पब्लिक ट्रांसपोर्ट के नाम पर खरीदी गई बसें खड़े-खड़े सड़ रही हैं.

अब फिर एक बार नई बसों की खरीद की तैयारी की जा रही है. केंद्र की ओर से भी बड़ी संख्या में बसें राँची को स्मार्ट बनाने के लिए मिलने वाली हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 28, 2021, 6:45 PM IST
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रांची. रांची (Ranchi) के अपर बाजार (Uppar Bazar) स्थित बकरी बाजार (Bakari Bazar) ग्राउंड में लाल और सफेद रंग की कई मिनी बसें (Mini Buses) वर्षों से पड़ी-पड़ी सड़ (Rotten) रही हैं. इस ग्राउंड को रांची नगर निगम (Ranchi Municipal Corporation) का वेयर हाउस भी कह सकते हैं. इन बसों के फ्रंट पर सिटी बस सर्विस लिखा है. इसके एक साइड 'द रांची नगर निगम' तो दूसरी ओर 'जवाहर लाल नेहरू शहरी पुनरुत्थान मिशन (JNURUM)' लिखा है.

दरअसल ये बसें स्मार्ट होती राजधानी रांची में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए खरीदी गई थीं. लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण ये कबाड़ में तब्दील हो गईं. दुखद बात यह है कि अब फिर एक बार नई बसों की खरीद की तैयारी की जा रही है. केंद्र की ओर से भी बड़ी संख्या में बसें राँची को स्मार्ट बनाने के लिए मिलने वाली हैं.

पुराने अनुभव से कुछ नहीं सीखा



स्मार्ट रांची में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए जवाहर लाल नेहरू शहरी पुनरुत्थान मिशन (JNURUM) के तहत निगम ने बसों की खरीद की थी. तब इन बसों को रांची के सभी रूटों पर चलाने की योजना थी. शुरुआती दिनों में कुछ दिन तक कई रूटों पर सिटी बसें दिखीं. यहां तक कि रांची से जोन्हा फॉल और अन्य दूसरे स्थानों तक भी बसें जाती थीं. पर धीरे-धीरे ज्यादातर बसें अपर बाजार स्थित रांची नगर निगम के डंपिंग स्टेशन में डंप होती गईं. ऑफ द रिकॉर्ड इस बारे में दो बातें बताई जाती हैं. एक तो यह कि बस परिचालन में नुकसान होता गया और दूसरा कई रूटों के लिए ड्राइवर नहीं मिले. जब निजी एजेंसी को बस चलाने की जवाबदेही मिली तो वह भी सिर्फ 2-3 रूटों पर बसें चलाने को तैयार हुई.
महज दो रूटों पर चल रही हैं बसें

यातायात के लिए टेम्पो पर निर्भरता कम करने, ट्रैफिक को सुचारू बनाने और पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए खरीदी गईं बसें कबाड़ बनती गईं और राजधानी में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में टेम्पो ही लाइफ लाइन बना रहा. स्थित यह है कि अब राजधानी के महज दो रूटों पर ही सिटी बसें दिखाई देती हैं.

टेम्पो पर निर्भरता की वजह

राजधानी के लोग कहते हैं कि वे ऑफिस, दुकान या स्कूल-कॉलेज जाने के लिए ज्यादा भाड़ा देकर ऑटो को प्राथमिकता इसलिए देते हैं कि समय पर गंतव्य पर पहुंचना होता है. दूसरी वजह है कि रांची में हर रूट पर बसें नहीं मिलतीं जैसा कि दूसरे बड़े शहरों में यह आसानी से उपलब्ध है.
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