झारखंड के दो बड़े फैसले, ब्लैक फंगस को महामारी माना, डॉक्टरों का रिटायरमेंट टाला

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Covid-19 की तीसरी लहर को लेकर झारखंड सरकार तैयारी के दावे कर ही रही थी, अब ब्लैक फंगस की रोकथाम को लेकर भी कमर कसने की कवायद हो रही है. जानिए राज्य सरकार के दो बड़े कदमों का पूरा मतलब क्या है.

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    रांची. राज्य में म्यूकरमायकोसिस यानी ब्लैक फंगस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए झारखंड कैबिनेट ने मंगलवार को एक प्रस्ताव मंज़ूर करते हुए इसे महामारी घोषित कर दिया. मृत्यु दर के मामले में बेहद घातक साबित हुई इस बीमारी ने अन्य राज्यों के साथ ही झारखंड में भी कहर बरपाया है. अब तक के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में इस साल ब्लैक फंगस के चलते 26 लोग मौत के मुंह में जा चुके हैं. यानी हालात ये हैं कि दो महामारियों को लेकर झारखंड को एक साथ रणनीति बनाने की ज़रूरत पेश आ रही है. ऐसे में, कैबिनेट ने एक और अहम कदम उठाते हुए फ़िलहाल रिटायर होने वाले डॉक्टरों का सेवाकाल बढ़ा दिया है.

    किसी बीमारी को महामारी घोषित करने का एक सामान्य अर्थ यह होता है कि सरकारी और निजी अस्पतालों को बीमारी से जुड़े हर मामले को संबंधित विभाग को रिपोर्ट करना होता है, ताकि महामारी के फैलने के बारे में ज़रूरी डिटेल्स रिकॉर्ड में रहें. झारखंड की कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने मीडिया को बताया कि महामारी घोषित किए जाने के प्रस्ताव को मंज़ूर किया गया है, जिसमें महामारी की रोकथाम के लिए नियमों और नियंत्रण के कदमों के बारे में ब्योरा है.

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    क्या कह रहे हैं अब तक के आंकड़े?
    स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक झारखंड में अब तक ब्लैक फंगस के कम से कम 82 मामले तो पुष्ट रूप से दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 54 मामलों को लेकर संशय रहा है. स्वास्थ्य विभाग के आईईसी के नोडल अफसर सिद्धार्थ त्रिपाठी के हवाले से खबरों में कहा गया कि अब तक इस महामारी से 26 जानें जा चुकी हैं और हज़ारीबाग में बीते सोमवार को ही एक व्यक्ति की मौत हुई. वहीं, राज्य के विभिन्न अस्पतालों से 52 मरीज़ों को छुट्टी भी दी जा चुकी है.

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    इस महामारी का प्रकोप सबसे ज़्यादा राजधानी रांची में ​ही दिखा, जहां 30 केस रिपोर्ट हुए और 8 मौतें भी. आधिकारिक तौर पर बताया गया कि राज्य के किसी भी ज़िले की तुलना में यह आंकड़ा सबसे ज़्यादा रहा. एक साथ दो महामारियों के दौर में झारखंड ने स्वास्थ्य के मोर्चे पर एक अहम कदम उठाया है.

    डॉक्टरों को दिया गया एक्सटेंशन
    चूंकि राज्य अभी कोविड 19 संक्रमण की दूसरी लहर से किसी तरह निपटने के बाद तीसरी लहर से निपटने की तैयारी कर रहा है और साथ ही, एक और महामारी को लेकर हालात चिंताजनक हो रहे हैं. इसी बीच, एक अहम खबर यह है कि राज्य कैबिनेट ने एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंज़ूर करते हुए रिटायर होने के करीब पहुंचे डॉक्टरों की सेवा की अवधि अगले साल तक के लिए बढ़ा दी है.

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    दादेल ने बताया कि जो डॉक्टर राज्य में मई और सितंबर 2021 के बीच रिटायर होने जा रहे थे, उन्हें मार्च 2022 तक के लिए एक्सटेंशन दे दिया गया है. यानी अभी वो मार्च तक सेवाएं देंगे. इसी तरह, सितंबर 2021 से मार्च 2022 के बीच जो डॉक्टर रिटायर होने वाले हैं, उन्हें भी छह महीने के लिए सेवा का एक्सटेंशन दिया गया है. ज़ाहिर तौर पर यह कदम महामारियों के दौर से जूझने के लिए फ्रंटलाइन वर्कफोर्स को मज़बूत बनाए रखने के लिए उठाया गया है.

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