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झारखंड सेंट्रल यूनिवर्सिटी में नियुक्ति घोटाला: CBI जांच शुरू, तत्कालीन वीसी ने नियमों की अनदेखी कर रिश्तेदारों को बांटीं नौकरियां

झारखंड सेंट्रल यूनिवर्सिटी में नियुक्ति घोटाला: CBI जांच शुरू, तत्कालीन वीसी ने नियमों की अनदेखी कर रिश्तेदारों को बांटीं नौकरियां

झारखंड सेंट्रल यूनिवर्सिटी में नियुक्ति घोटाले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है.

झारखंड सेंट्रल यूनिवर्सिटी में नियुक्ति घोटाले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है.

Jharkhand Central University: साल 2015 में शिकायत मिलने के बाद यूजीसी ने सेंटर यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड में नियुक्तियों की जांच की और गड़बड़ी पाया. इसके बाद यूजीसी ने तमाम नियुक्तियों पर रोक लगा दी थी. बावजूद इसके 2017 से लेकर 2019 तक बिना किसी नियमावली के यूनिवर्सिटी में शिक्षक और शिक्षकेतर पदों पर करीब 125 लोगों की बहाली अवैध तरीके से की गई.

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    रांची. रांची स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड में नियुक्तियों में गड़बड़ी का मामला इनदिनों सुर्खियों में है. बताया जा रहा है कि 2017 से लेकर 2019 तक हुई नियुक्ति में बड़े पैमाने पर यूजीसी नियमावली की अनदेखी की गयी. मामला सामने आने के बाद पहले तो इसकी जांच मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन ने की और अब गड़बड़ी की परतें खोलने का जिम्मा सीबीआई ने उठा लिया है.

    रांची के मनातू में मौजूद सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड की भव्य इमारत पिछले कुछ दिनों से किले में तब्दील हो चुकी है. ‌इसके अंदर जाने की इजाजत किसी को भी नहीं है. दरअसल इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड में 2017 से 2019 तक करीब 125 पदों पर नियुक्ति सवालों के घेरे में है. इसकी जांच अब तेजी से की जा रही है.

    गड़बड़ी का ये पूरा मामला 50 पद शिक्षक और 75 पद शिक्षकेतर पदों से जुड़ा हुआ है. इसी सिलसिले में जांच करने गत रविवार रात मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन की टीम सेंट्रल यूनिवर्सिटी पहुंची थी और अगले दिन सोमवार को दस्तावेजों को खंगाला था. टीम नियुक्ति से जुड़े कई दस्तावेजों को अपने साथ ले गई.

    सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इसके बाद मंगलवार को सीबीआई की टीम सेंट्रल यूनिवर्सिटी पहुंची थी और वर्तमान वीसी और रजिस्ट्रार को नियुक्ति संबंधित तमाम फाइलें सौंपने का निर्देश दिया. मिली जानकारी के मुताबिक सीबीआई की टीम लगातार सीयूजे पहुंचकर दस्तावेजों को खंगाल रही है.

    दरअसल 2010 में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड में नियुक्ति नियमावली बनी, जिसके तहत 10 पदों पर ही नियुक्ति की जानी थी. लेकिन इसकी अनदेखी कर उन 10 पदों से बाहर जाकर भी बेधड़क नियुक्तियां की गई. ‌ 2015 में शिकायत मिलने के बाद यूजीसी ने सेंटर यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड में नियुक्ति की जांच की और गड़बड़ी की शिकायत को सही पाया. ‌इसके बाद यूजीसी ने तमाम नियुक्तियों पर रोक लगा दी. साथ ही यह भी आदेश जारी किया कि बिना नियुक्ति नियमावली के कोई भी नई नियुक्ति नहीं की जाएगी. नियमावली को लेकर भी यूजीसी का अप्रूवल जरूरी होगा. बावजूद इसके 2017 से लेकर 2019 तक बिना किसी नियमावली के सीयूजे में शिक्षक और शिक्षकेतर पदों पर करीब 125 लोगों की बहाली अवैध तरीके से की गई.

    इसमें रजिस्ट्रार और डिप्टी रजिस्ट्रार से लेकर एमटीएस यानी multi-task स्टाफ की नियुक्ति शामिल है. ये तमाम नियुक्तियां 2017 से 2019 के बीच रहे तत्कालीन कुलपति नंदकुमार यादव इंदु के समय में हुई. सबसे बड़ी बात ये है कि इसमें करीब 22 ऐसे लोग हैं जो तत्कालीन कुलपति के रिश्तेदार और बेहद करीबी हैं. इसी दौरान एमटीएस के दो अनारक्षित पदों की बहाली के विरुद्ध 5 लोगों की नियुक्ति की गई थी. इसमें एक ओबीसी अभ्यर्थी जो कि तत्कालीन कुलपति के करीबी रिश्तेदार बताए जाते हैं, जिनकी उम्र साढ़े 44 साल थी. उन्हें भी ओबीसी कैटेगरी में बहाल किया गया, जबकि इन पदों की उम्र सीमा सिर्फ 25 साल तक की थी. ‌

    Tags: Jharkhand news, Ranchi news

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