बंगाल चुनाव में ममता को 'आदिवासी धर्म कोड' के जरिए जीत दिला पाएंगे सोरेन? 16 सीटों पर प्रचार करेंगे झारखंड के सीएम


आदिवासियों के समर्थन के लिए हेमन्‍त सोरेन और अन्‍य बड़े नेताओं के साथ शिबू सोरेन बंगाल व‍िधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के ल‍िए प्रचार करेंगे.

आदिवासियों के समर्थन के लिए हेमन्‍त सोरेन और अन्‍य बड़े नेताओं के साथ शिबू सोरेन बंगाल व‍िधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के ल‍िए प्रचार करेंगे.

Jharkhand News: वैसे बंगाल में विधानसभा के 16 सीट आदिवासियों के लिए सुरक्षित हैं. अनेक असुरक्षित ऐसी सीटें भी हैं जहां आदिवासियों की उल्‍लेखनीय संख्‍या है. चाय बगान में भी झारखण्‍ड से बड़ी संख्‍या में श्रमिक काम करते हैं. ऐसे में हेमन्‍त सोरेन और अन्‍य बड़े नेताओं के साथ शिबू सोरेन के सभा करने से ममता बनर्जी को आदिवासियों का समर्थन म‍िल सकता है.

  • Share this:
झाखण्‍ड सीमा से लगे अनेक विधानसभा क्षेत्र हैं या भीतरी इलाकों में भी कुछ क्षेत्र हैं जहां आदिवासी हैं. झामुमो की पहचान ही आदिवासियों को लेकर है. हाल में जब जनगणना के कॉलम में सरना आदिवासी धर्म कोड को स्‍थान देने के मामले में हेमन्‍त ने नेतृत्‍व किया तो देश के आदिवासियों के बीच उनकी पहचान बनी. विधानसभा से सरना आदिवासी धर्म कोड को लेकर सर्वसम्‍मत प्रस्‍ताव पारित कर केंद्र को भेजा. इसमें भाजपा को भी हेमन्‍त की रणनीति के आगे घुटने टेकने पड़े और विधानसभा में समर्थन करना पड़ा.

जनगणना में जगह मिले या नहीं मगर इसकी लड़ाई का मतलब हेमन्‍त सोरेन अच्‍छी तरह से समझते हैं. यही कारण है कि नीति आयोग की बैठक हो या हार्वर्ड इंडिया कांफ्रेंस में लेक्‍चर, हेमन्‍त सोरेन सरना आदिवासी धर्म कोड को कायदे से उठाना नहीं भूले. ममता इसी को लेकर बंगाल में आदिवासियों पर हेमन्‍त के प्रभाव को बंगाल में लाना चाहती है.

वैसे बंगाल में विधानसभा के 16 सीट आदिवासियों के लिए सुरक्षित हैं. अनेक असुरक्षित ऐसी सीटें भी हैं जहां आदिवासियों की उल्‍लेखनीय संख्‍या है. चाय बगान में भी झारखण्‍ड से बड़ी संख्‍या में श्रमिक काम करते हैं. यह बात अलग है कि पिछले तीन दशक में कोई सात चुनाव में तकदीर आजमाने के बावजूद झामुमो का खाता तक नहीं खुला. एक प्रतिशत भी वोट किसी चुनाव में हासिल नहीं हुआ. इसके बावजूद ममता बनर्जी चाहेंगी कि आदिवासियों के समर्थन के लिए हेमन्‍त सोरेन और अन्‍य बड़े नेताओं के साथ शिबू सोरेन की भी सभा हो.

दरअसल सत्‍ता में होने के साथ जनगणना में सरना धर्म कोड के मामले ने हेमन्‍त का कद आदिवासियों में बढ़ा दिया है.ऐसे में झामुमो और राजद का ममता को समर्थन मिलता है तो गरीबों, आदिवासियों के वोट को लेकर वे थोड़ा राहत महसूस कर सकती हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज