किसानों के समर्थन में खुलकर आई झारखंड कांग्रेस, केंद्र के रवैये पर किए तीखे सवाल

एक विरोध प्रदर्शन के काले झंडे दिखाते प्रदर्शनकारी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नवजोत सिंह सिद्धू का वीडियो वायरल (Navjot Singh Siddhu Video) होने के बाद कई नेताओं व पार्टियों ने किसानों को समर्थन देना शुरू कर दिया है. झारखंड कांग्रेस के नेताओं ने न केवल काले झंडे लगाए बल्कि बयान भी जारी किए.

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    रांची. कोरोना महामारी के बावजूद कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का प्रदर्शन लगातार कई महीनों से जारी है और अब इसे देश के कुछ हिस्सों में राजनीतिक समर्थन मिलना भी शुरू हो रहा है. इसी सिलसिले में कांग्रेस पार्टी की झारखंड इकाई ने किसानों के विरोध को समर्थन दिया और पार्टी के सदस्यों ने अपने घरों में काले झंडे लगाए और काले रंग के बैंड्स बांधकर बुधवार को किसानों की मांगों की पुरज़ोर वकालत की. सिर्फ झारखंड कांग्रेस ही नहीं बल्कि कुछ अन्य पार्टियों द्वारा भी इस तरह के कदम उठाए जाने की खबरें हैं.

    वास्तव में संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों के आंदोलन के छह महीने पूरे होने के मौके पर अपील की थी कि इस तरह किसानों के प्रति समर्थन जताया जाए. इसके जवाब में हाल में, कांग्रेस नेता और पंजाब के चर्चित नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने घर पर काला झंडा लगाया था, जिसका वीडियो काफी वायरल हुआ था. खबरों की मानें तो अब झारखंड कांग्रेस ने बाकायदा केंद्र सरकार के कृषि कानूनों की आलोचना करने वाला बयान भी जारी किया.

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    'किसान विरोधी कानून वापस लिये जाएं'
    विधायकों के साथ ही झारखंड के तमाम कांग्रेसी नेताओं ने काले झंडे और काली पट्टियां बांधने के अलावा बयान में केंद्र से कृषि कानूनों को वापस लिये जाने की मांग की. कांग्रेस के झारखंड प्रमुख और राज्य सरकार में वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'इन कानूनों की वास्तव में कोई ज़रूरत ही नहीं थी. कानूनों से पहले किसानों को विश्वास में नहीं लिया गया और राज्य सभा में जैसे बिल पास हुए, देशवासी वो तरीका स्वीकार नहीं करेंगे.'

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    नवजोत सिंह सिद्धू ने किसानों के समर्थन में घर पर काला झंडा लगाया था.


    कृषि मंत्री ने भी पूछे तीखे सवाल
    राज्य के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने भी किसानों के सुर में सुर मिलाते हुए केंद्र पर निशाना साधा और कहा कि 'लंबे समय से विरोध करने के दौरान बड़ी संख्या में किसानों की मौतें हुईं, इसके बावजूद केंद्र सरकार असंवदेनशील रहते हुए कोई सकारात्मक कदम नहीं उठा सकी. कृषि राज्यों के अधिकार क्षेत्र का विषय है और केंद्र ने राज्यों से बगैर बातचीत किए इस तरह के कानून बनाए.'