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झारखंड स्थापना दिवस पर रंग में भंग न पड़ जाए, विरोध की इन बुलंद आवाजों से कैसे निबटेगी हेमंत सरकार?

झारखंड स्थापना दिवस पर रंग में भंग न पड़ जाए, विरोध की इन बुलंद आवाजों से कैसे निबटेगी हेमंत सरकार?

हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ विरोध की आवाज बुलंद होती जा रही है.

हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ विरोध की आवाज बुलंद होती जा रही है.

Jharkhand Foundation Day: 15 नवम्बर को झारखंड राज्य का स्थापना दिवस है. लेकिन राज्य सरकार से नाराज कई संगठनों ने 15 नवंबर तक का अल्टीमेटम दे दिया है. बात चाहे बेरोजगर नौजवानों की करें या पारा शिक्षकों की, आदिवासी- मूलवासी संगठन की करें या OBC मोर्चे की, हर कोई राज्य सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं.

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रांची. 15 नवंबर को झारखंड स्थापना दिवस है. हालांकि इस बार स्थापना दिवस मौजूदा हेमंत सोरेन सरकार की परेशानी बढ़ाने वाला साबित होने जा रहा है. राज्य सरकार से नाराज कई संगठनों ने 15 नवंबर तक का अल्टीमेटम दे दिया है. बात चाहे बेरोजगर नौजवानों की करें या पारा शिक्षकों की, आदिवासी- मूलवासी संगठन की करें या OBC मोर्चे की, हर कोई राज्य सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं.

झारखंड राज्य गठन के 21 साल पूरे होने वाले हैं. 15 नवम्बर को स्थापना दिवस मनाने की तैयारी प्रदेश की हेमंत सोरेन सरकार कर रही है, वहीं दूसरी तरफ एक तैयारी सरकार से नाराज संगठनों की भी चल रही है. सरकार से नाराज संगठनों में सबसे बड़ी तादाद बेरोजगर नौजवानों की है. हर बार की तरह इस बार भी JPSC परीक्षा परिणाम विवादों में है. साल 2021 को रोजगार का साल बताने वाली सरकार रोजगार देने के बजाय नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने में लगी है. राज्य के नौजवान हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर चुके हैं.

JPSC अभ्यर्थी कहकशा कमाल कहती हैं कि आखिर कब तक राज्य के नौजवानों के साथ रोजगार के नाम पर ठगने का काम चलता रहेगा. राज्य गठन के बाद से यहां के नौजवान सरकार की थोथली दलील और आश्वासन से तंग आ चुकी है. अब उन्हें न्याय चाहिए और न्याय के लिये वे कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं.

राज्य सरकार के खिलाफ गुस्सा सिर्फ बेरोजगर नौजवानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की 54 आदिवासी-मूलवासी संगठन भी अब आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है.

आदिवासी-मूलवासी संगठन के नेता अंतु तिर्की ने हेमंत सोरेन सरकार को 15 नवंबर तक राज्य में स्थानीय और नियोजन नीति घोषित करने का अल्टीमेटम दे दिया है. इसके बाद खनिज संपदाओं को राज्य से बाहर ले जाने पर रोक और झारखंड बंद जैसे कार्यक्रम की रूप रेखा तैयार की जा रही है. हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ 54 संगठनों की गोलबंदी को राजनीतिक रूप बेहद ही खास और सरकार के लिये बड़ी परेशानी माना जा रहा है.

इसके बाद बारी आती है राज्य के 65 हजार पारा शिक्षकों की. पारा शिक्षकों ने तो 14 नवंबर पर स्थायीकरण और मानदेय बढ़ोत्तरी को लेकर सरकार को मौका दिया है. अगर राज्य सरकार पारा शिक्षकों की मांग को पूरा करने में असफल रही, तो राज्य स्थापना दिवस के दिन 15 नवम्बर को पारा शिक्षक रांची पहुंचेंगे.

एकीकृत पारा शिक्षक संघ के ऋषिकेश पाठक ने राज्य सरकार को काला झंडा दिखाने और विकास के नाम पर की जा रही घोषणाओं की पोल खोलने का ऐलान किया है. आंदोलन के बावत जिला स्तर पर पारा शिक्षकों की बैठक में ये निर्णय लिया जा चुका है. बिहार के तर्ज पर पारा शिक्षकों के लिये नियमावली बनाने को लेकर कई दौर की बैठक हो चुकी है.

झारखंड में OBC आरक्षण का मसला भी तूल पकड़ता जा रहा है. राष्ट्रीय OBC मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता ने सरकार से 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग करते हुए 15 नवंबर तक का अल्टीमेटम दे दिया है. मोर्चा ने तो 13 नवंबर को इस मांग को बुलंद करने के लिये उपवास का कार्यक्रम भी रखा है.

OBC नेताओं का कहना है कि चुनाव के वक्त आरक्षण का वाजिब हक देने का वादा करने वाली सरकार अब मुंह फेर रही है. आबादी के हिसाब से आरक्षण की मांग का आलम ये है कि विपक्षी दल से लेकर सत्ताधारी दल के विधायकों का समर्थन भी खुले मंच से मिलने लगा है.

राज्य की हेमंत सोरेन सरकार इस बार स्थापना दिवस समारोह खुले मैदान के बजाय बंद सभागार में मनाने की तैयारी कर रही है. ऐसा कोरोना संक्रमण को लेकर गाइड लाइन का पालन करने और सरकार के खिलाफ उठ रही आवाज और आंदोलन को देखते हुए किया जा रहा है. हालांकि राज्य सरकार इन तमाम मुद्दों से भाग नहीं सकती, क्योंकि सत्ताधारी दलों के चुनावी घोषणा पत्र में इनमें से ज्यादातर मुद्दे प्राथमिकता में शामिल थे.

Tags: Hemant soren government, Jharkhand Government, Jharkhand news

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