झारखंड: जमीन लेकर उद्योग नहीं लगाने वाली कंपनियों पर कार्रवाई शुरू, जुर्माना वसूलेगी सरकार

ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी को रांची के ओरमांझी में उद्योग लगाने के लिए 25 एकड़ जमीन दी गई, लेकिन कंपनी ने मात्र 7 एकड़ पर उद्योग लगाया.

ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी को रांची के ओरमांझी में उद्योग लगाने के लिए 25 एकड़ जमीन दी गई, लेकिन कंपनी ने मात्र 7 एकड़ पर उद्योग लगाया.

रांची के ओरमांझी में ओरियंट क्राफ्ट कंपनी ने 25 एकड़ जमीन लेने के बाद मात्र 7 एकड़ में ही उद्योग (Industry) लगाया है. ऐसे में अब कंपनी को बाकी बची 18 एकड़ जमीन को लेकर नोटिस जारी किया गया है.

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रांची. झारखंड में अब वैसे तमाम औद्योगिक घरानों को जमीन जुर्माना के साथ लौटाने होंगे, जिन्होंने अब तक सरकार (Hemant Government) के द्वारा दी गई जमीन पर उद्योग (Industry) नहीं लगाया और लोगों को रोजगार देने का काम नहीं किया. शुरुआत रांची के ओरमांझी स्थित ओरियंट क्रॉफ्ट कंपनी से की गई है. अप्रैल माह में सरकार ने ऐसे 25 से 30 कंपनियों को नोटिस भेजने की तैयारी है. उद्योग विभाग ने इसको लेकर जमीन लेने वाले कंपनियों की समीक्षा भी शुरू कर दी है.

झारखंड में उद्योग को लेकर फरवरी 2017 में आयोजित मोमेंटम झारखंड के तहत ग्लोबल इन्वेस्टर समिट का सच अब सामने आने लगा है. तत्कालीन रघुवर सरकार द्वारा इस समिट के आयोजन का उद्देश्य राज्य में उद्योग को बढ़ावा और रोजगार पैदा कराना था. कार्यक्रम में करीब 210 एमओयू के साथ 3 लाख 10 हजार 277 करोड़ के निवेश का दावा किया गया था. लेकिन आज ये दावे पूरी तरह से खोखला साबित हुआ है. समिट में करीब 11 हजार डेलिगेट्स की भागीदारी भी झारखंड में उद्योग विस्तार की राह को आगे नहीं बढ़ा पाई. उद्योग विस्तार के नाम पर देशभर के इच्छुक औद्योगिक घरानों और निवेशकों को दी गई जमीन अब सरकार वापस लेने की तैयारी कर रही है.

राज्य में औद्योगिक विस्तार के लिये उद्योग विभाग ने 4 जोन में कंपनियों को जमीन आवंटित किया था. आदित्यपुर जोन में 209 कंपनियों को, बोकारो जोन में 139 कंपनियों को, संथाल परगना जोन में 165 कंपनियों को, और रांची जोन में 152 कंपनियों को जमीन आवंटित की गई थी. हैरान करने वाली बात ये है कि तत्कालीन राज्य सरकार ने इन कंपनियों ने टोकन मनी पर जमीन दिया था. जमीन पाने वालों में ऐसे लोगों या कंपनियों के नाम हैं, जिसके बारे में कभी भी किसी ने कुछ सुना तक नहीं.

वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार ने अब इसकी समीक्षा शुरू कर दी है कि जमीन पाने वाले औद्योगिक घरानों ने अब तक उधोग विस्तार के नाम पर क्या कुछ किया. रांची के ओरमांझी में ओरियंट क्राफ्ट कंपनी ने तो 25 एकड़ जमीन लेने के बाद मात्र 7 एकड़ में ही उद्योग निर्माण का काम किया. ऐसे में अब कंपनी को बाकी बची 18 एकड़ जमीन लेने के लिए नोटिस जारी किया गया है. वहीं अप्रैल माह में समीक्षा के बाद 25 से 30 कंपनियों को नोटिस जारी करने की तैयारी है.
झारखंड में नई उद्योग नीति की घोषणा 31 मार्च के बाद होना है. उद्योग विभाग ने नई नीति के साथ-साथ राज्य में उद्योग स्थापना और विस्तार पर नये सिरे से तैयारी शुरू कर दी है. हर बार की तरह इस बार भी राज्य में औद्योगिक घरानों को जमीन मुहैया कराने का मुद्दा जटिल है. विभाग का लक्ष्य पहले से आवंटित जमीन पर उद्योग लगाने में असफल कंपनियों से जमीन वापस लेकर नये लोगों को अवसर प्रदान करना है.

झारखंड चैंबर का मानना है कि अगर विभाग की वजह से उद्योग निर्माण नहीं हो सका, तो उस उद्योगपति को मौका मिलना चाहिए और अगर उद्योगपति उद्योग लगाने को लेकर इच्छुक नहीं है, तो उनको दी गई जमीन बेशक वापस होनी चाहिए.

दरअसल उद्योग विभाग की ये गंभीरता राज्य में औद्योगिक विस्तार के लिए कम पड़ रही जमीन की वजह से है. विभाग ने लैंड बैंक पर काम करना शुरू कर दिया है. ऐसे में विभाग ऐसी किसी भी कंपनी को खाली पड़ी जमीन छोड़ने के मूड में नहीं, जो आवंटित जमीन पर उद्योग लगाने को लेकर गंभीर नहीं है. उनसे ना सिर्फ जमीन वापस लेने की तैयारी है, बल्कि उनसे जुर्माना भी वसूला जाएगा.
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