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छत्तीसगढ़ की इस योजना को झारखंड सरकार कर सकती है लागू, गोबर बेचकर किसान करते हैं कमाई

झारखंड के कृषि मंत्री बादल ने रायपुर में छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे से मुलाकात की.
झारखंड के कृषि मंत्री बादल ने रायपुर में छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे से मुलाकात की.

छत्तीसगढ़ सरकार (Government of Chhattisgarh) की सबसे सफल योजना गौठान बहार योजना (Gauthan Yojna) का झारखंड के कृषि मंत्री बादल ने जायजा लिया. उन्होंने इस योजना को झारखंड में भी लागू करने के संकेत दिये.

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रांची. झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री बादल (Badal) ने छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे (Ravindra Chaube) से रायपुर में मुलाकात की. इस दौरान छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आए हैं, जिसे झारखंड में भी लागू किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में 90 लाख मैट्रिक टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा गया है. इस बार इसे और बढ़ाया जाएगा. धान खरीद के पैसे को किसानों के खाते में सीधे डाल दिया जाता है. गाय के गोबर का समुचित उपयोग हो और लोगों को अपने घर पर रोजगार मिल सके, इस उद्देश्य से राज्य में गौठान योजना (Gauthan Yojna) चलाई जा रही है.

बकरी के दूध से बनता है साबुन

झारखंड के कृषि मंत्री ने छत्तीसगढ़ कृषि विभाग के कई योजनाओं का जायजा लिया. सबसे पहले कल्पतरू मल्टी यूटिलिटी सेंटर गए, जहां 200 महिलाओं को रोजगार दिए गए हैं. प्रत्येक दिन इन महिलाओं को 200 रुपये दिए जाते हैं. यहां 28 प्रकार की वस्तुएं बनाई जाती हैं. अगरबत्ती, घरों में जलाये जाने वाले बल्ब, झालर, चप्पल, खाने की सामग्री, मशरूम, बकरी के दूध और मधुमक्खी के रस, आलू रस से साबुन बनाए जाते हैं.



बादल रायपुर जिले के खुटेरी उमरिया और महासमुंद जिले के बसना भी गए, जहां उन्होंने धान खरीद का विधिवत उद्घाटन किया. कृषि मंत्री महासमुंद जिले के भोथलडीह साख संस्था भी गए, जहां सरायपाली के कांग्रेस विधायक किस्मत लाल नंद ने प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था मर्यादित भोथलडीह का भी दौरा किया. छत्तीसगढ़ में किसानों से धान की खरीद आज से शुरू हो गई है.
गौठान योजना का भी लिया जायजा

छत्तीसगढ़ सरकार की सबसे सफल योजना गौठान बहार का भी बादल ने जायजा लिया. छत्तीसगढ़ सरकार 2 रुपये प्रति केजी की दर से गाय का गोबर खरीदती है. इस योजना के पीछे सरकार की मंशा ये है कि गांव में या किसी भी जगह पर यदि किसी को गोबर भी मिल जाता है, तो उस गोबर का मूल्य संवर्धन कर कमाई की जा सकती है. छत्तीसगढ़ में गोबर से दीये, गमले, गुल्लक बनाये जाते हैं. इसके लिए सरकार जगह-जगह गोबर उठाव की व्यवस्था की है. जहां लोग सरकार को गोबर देकर आसानी से पैसा कमा सकते हैं. गोबर देने वालों को 15 दिनों के अंदर भुगतान कर दिया जाता है. इसके लिए किसानों का खाता खोला गया है.

कृषि मंत्री बादल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सीखने के लिए बहुत कुछ है. जल्द ही वे विभागीय अधिकारियों की एक टीम को छत्तीसगढ़ भेजेंगे. टीम यहां के विकास मॉडल का अध्ययन करेगी.
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