कोरोना संकट में झारखंड सरकार को 26 लाख पौधे लगवाने की क्यों सूझी?
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कोरोना संकट में झारखंड सरकार को 26 लाख पौधे लगवाने की क्यों सूझी?
झारखंड सरकार ने 26 लाख पौधे लगवाने की योजना बनाई है. (फाइल फोटो)

कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि बागान (Plantation) के अलावा बकरी पालन के जरिये सरकार ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश में है कि राज्य के मजदूरों (Laborers) को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़े.

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रांची. कोरोना संकट (Corona Crisis) की इस घड़ी में हेमंत सोरेन सरकार (Hemant Government) ने सूबेभर में 26 लाख पौधे (Plants) लगवाने की योजना बनाई है. ये वैसे पौधे होंगे, जो आगे चलकर राज्य को फल उत्पादन के मामले में नई पहचान दिलाएंगे. दरअसल सरकार ने एक जिला, एक फल की तैयारी की है, यानी हर जिला किसी खास फल के उत्पादन में योगदान देगा. इस योजना के तहत बाहर से प्रदेश लौट रहे हजारों मजदूरों (Laborer) को रोजगार भी मिलेगा.

बीएयू की मदद दो विभागों ने की तैयारी 

कोरोना काल की परेशानियों को अवसर में बदलने की तैयारी हेमन्त सोरेन सरकार ने कर ली है. कृषि विभाग, ग्रामीण विकास विभाग और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के सहयोग से राज्य के प्रत्येक प्रखण्ड में सौ पौधे वाला बागान लगाएगा. कृषि विभाग ने इसके लिए सभी जिलों के डीसी और डीडीसी को तैयारी करने के लिए कहा है.



कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि बागान के अलावा बकरी पालन के जरिये सरकार ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश में है कि राज्य में ही मजदूरों को रोजगार मिल सके. उन्हें दो जून की रोटी के लिए दूसरे प्रदेश न जाना पड़े.



बीएयू ने जिलावार रिपोर्ट सौंपी 

सरकार ने इस सिलसिले में बीएयू से जिलावार रिपोर्ट मांगी थी, ताकि उस आधार पर जिलों में पौधे लगाये जा सके. बीएयू ने सभी 24 जिलों के लिए प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. रिपोर्ट में लातेहार को नाशपाती, पलामू को अमरूद, कोल्हान के जिलों और जामताड़ा के लिए काजू, देवघर के लिए आम, वहीं रांची, गुमला और खूंटी के लिए कटहल के पौधे लगाने की अनुशंसा की है. यह रिपोर्ट मिट्टी एवं अन्य कारकों के आधार पर तैयार की गई है.

बीएयू के हॉर्टिकल्चर विभाग के हेड डॉ केके झा ने सरकार की इस योजना की प्रशंसा करते हुए कहा कि सरकार को जिलावार रिपोर्ट सौंप दी गई है. राज्य में फल उत्पादन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं.

मनरेगा के जरिये होगा काम

सरकार मनरेगा के माध्यम से 26 लाख पौधे लगाएगी. बाद में इसे इंटिग्रेटेड फार्मिंग तक ले जाने की योजना है. फिलहाल इसके जरिये सरकार हजारों प्रवासी मजदूरों को रोजगार से जोड़ सकती है, जो फिलवक्त सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है.

इनपुट- उपेन्द्र कुमार 

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