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केन्द्र की आत्मनिर्भर योजना मद से कर्ज लेकर डीवीसी समेत अन्य बिजली कंपनियों का बकाया चुकाएगी झारखंड सरकार

केन्द्र की आत्मनिर्भर योजना मद से कर्ज लेकर डीवीसी समेत अन्य बिजली कंपनियों का बकाया चुकाएगी झारखंड सरकार

सीबीआई जांच के लिए सामान्य सहमति वापस लेने वाला झारखंड देश का आठवां राज्य है.

सीबीआई जांच के लिए सामान्य सहमति वापस लेने वाला झारखंड देश का आठवां राज्य है.

झारखंड सरकार (Jharkhand Government) पर डीवीसी सहित कई बिजली उत्पादक कंपनियों का 5608.32 करोड़ रुपये का बकाया है. बकाया राशि के भुगतान के लिए सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है.

रांची. दामोदर घाटी निगम (DVC) एवं अन्य बिजली वितरण कंपनी की बकाया राशि का भुगतान झारखंड सरकार (Jharkhand Government) केन्द्र की आत्मनिर्भर भारत योजना मद से ऋण लेकर करने जा रही है. इस संबंध में राज्य सरकार ने केन्द्र को प्रस्ताव भेज दिया है. भारत सरकार ने आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत बिजली वितरण कंपनियों को उत्पादक कंपनियों का बकाया चुकाने के लिए 90 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. यह सॉफ्ट लोन होता है, जिसमें तीन साल तक कोई ब्याज नहीं देना होता है.

केन्द्र ने झारखंड सरकार को 15 दिनों के अंदर डीवीसी के बकाये का भुगतान करने के लिए नोटिस भेजा है. इसकी समयसीमा सोमवार को खत्म हो गई है. इधर राज्य सरकार के कड़े रुख के बाद केन्द्रीय उर्जा मंत्रालय की टीम 30 सितंबर को रांंची में मुख्य सचिव के साथ बैठक कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश करेगी.

गौरतलब है कि डीवीसी सहित कई बिजली उत्पादक कंपनियों के 5608.32 करोड़ का बकाया झारखंड सरकार पर है. जिसके भुगतान को लेकर लगातार दबाव बनाये जा रहे हैं.

जेयूवीएनएल एमडी केके वर्मा की माने तो राज्य में निर्वाध बिजली आपूर्ति हो रही है और सरकार डीवीसी के बकाये का भुगतान करने के लिए आत्मनिर्भर योजना के तहत लोन लेने के लिए केन्द्र को आवेदन भेजा है.



बता दें कि डीवीसी का बिजली आपूर्ति मद में झारखंड पर 5608.39 करोड़ का भारी-भरकम बकाया है. बार-बार डीवीसी द्वारा बिजली सप्लाई ठप करने की चेतावनी के बाद भी असर नहीं होने पर केंद्र सरकार ने अब चार समान किस्तों में संबंधित बकाया केंद्रीय अनुदान मद की राशि से काटने का अल्टीमेटम दिया है. हालांकि केंद्रीय उर्जा मंत्रालय ने इसके लिए ऋण लेने का भी विकल्प भी झारखंड सरकार को सुझाया है. झारखंड पर बिल चुकाने का दबाव है और ऐसे में फिलहाल ऋण लेने के अलावा राज्य के सामने कोई और कोई विकल्प नहीं दिख रहा है.

Tags: Central government, Electricity prices, Hemant soren

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