झारखंड सरकार ने विधानसभा चुनाव के लिए केन्द्र से मांगी अर्धसैनिक बलों की 275 कंपनियां

सीएम ने कहा कि शांतिपूर्ण विधानसभा चुनाव कराने के लिए झारखंड में 275 कंपनी अर्धसैनिक बलों की की आवश्यकता होगी. राज्य सरकार केंद्र की आभारी है कि झारखंड में जो भी केंद्रीय अर्धसैनिक बल उपलब्ध कराए गए हैं, वे लगातार झारखंड पुलिस के साथ मिलकर नक्सलियों से जूझ रहे हैं.

News18 Jharkhand
Updated: August 27, 2019, 12:09 AM IST
झारखंड सरकार ने विधानसभा चुनाव के लिए केन्द्र से मांगी अर्धसैनिक बलों की 275 कंपनियां
नक्सल प्रभावित राज्यों की बैठक में सीएम रघुवर दास ने कहा कि झारखंड में नक्सली घटनाओं में 60 फीसदी तक की कमी आई है. (फाइल फोटो)
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Updated: August 27, 2019, 12:09 AM IST
केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दिल्ली में नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई. इस बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास भी शामिल हुए. इस दौरान सीएम रघुवर दास ने कहा कि वर्तमान में राज्य को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की नितांत आवश्यकता है. दिसंबर 2014 से नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. इस प्रयास का ही परिणाम है कि 2015 से 2019 के बीच नक्सली घटनाओं में 60 प्रतिशत तक कमी आई है. नक्सलियों द्वारा आम लोगों को मारे जाने की घटनाओं में भी एक-तिहाई की कमी दर्ज की गई है. जबकि सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की संख्या दोगुनी से भी अधिक है. सीएम ने कहा कि वर्ष 2015 से 2019 के बीच आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की भी संख्या दुगनी हो गई है और पुलिस द्वारा नक्सलियों से हथियार की बरामदगी में भी 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बदलाव लाने के प्रयास

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी बहुआयामी रणनीति के तहत जहां एक तरफ पुलिस एवं अर्द्धसैनिक बल लगातार कंधे से कंधा मिलाकर नक्सलवाद के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत नक्सलियों का आत्मसमर्पण कराया जा रहा है. उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सरकार द्वारा फोकस एरिया डेवलपमेंट प्लान के तहत गरीब एवं आदिवासी जनता को आधारभूत संरचना उपलब्ध कराने के लिए अनेक विकास कार्य किये जा रहे हैं.

चुनाव में 275 कंपनी बल की होगी जरूरत

सीएम ने कहा कि शांतिपूर्ण विधानसभा चुनाव कराने के लिए झारखंड में 275 कंपनी अर्धसैनिक बलों की की आवश्यकता होगी. राज्य सरकार केंद्र की आभारी है कि झारखंड में जो भी केंद्रीय अर्धसैनिक बल उपलब्ध कराए गए हैं, वे लगातार झारखंड पुलिस के साथ मिलकर नक्सलियों से जूझ रहे हैं. झारखंड में नक्सलवाद अंतिम पड़ाव पर है. लिहाजा झारखंड में अर्धसैनिक बलों की संख्या को आने वाले दो-तीन वर्षों तक कम नहीं की जाए.

2500 से अधिक अवर निरीक्षकों की हुई बहाली

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस अवर निरीक्षक की भारी कमी नक्सल विरोधी अभियान के संचालन में मुख्य बाधा थी. पिछले ढाई दशक में मात्र 250 पुलिस अवर निरीक्षकों की ही बहाली हो पाई थी. उनकी सरकार द्वारा 2014 के बाद 2500 से ज्यादा पुलिस अवर निरीक्षकों की बहाली की गई है. प्रशिक्षण के बाद इनके फील्ड में आने से झारखंड पुलिस की कार्यशैली एवं कार्य क्षमता में अतुलनीय वृद्धि होगी.
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रिपोर्ट- अमितेश कुमार

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First published: August 27, 2019, 12:08 AM IST
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