Jharkhand News : 'अलग राज्य' आंदोलनकारियों को अब 20 साल बाद मिलेगी नौकरी और पेंशन

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन.

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन.

सीएम हेमन्त सोरेन (Chief Minister Hemant Soren) ने इसे अपना वादा निभाना बताते हुए कहा कि झारखंड राज्य बनने के 20 साल बाद राज्य के लिए आंदोलन करने वालों के प्रति यह न्याय हुआ है. जानिए किस तरह किसे नौकरी और पेंशन मिलेगी.

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रांची. झारखंड को बिहार से अलग कर नया राज्य बनाए जाने के लिए जिन लोगों ने आंदोलन में महती भूमिका निभाई थी, उन्हें सम्मानित करते हुए अब राज्य सरकार नौकरी और पेंशन देगी. जिन लोगों ने इस आंदोलन में अपनी जान गंवाई, उनके परिजनों के लिए भी यह योजना लागू रहेगी. क्रांतिकारी आदिवासी नेता बिरसा मुंडा की जयंती पर 15 नवंबर 2000 को झारखंड एक अलग राज्य बना था, लेकिन इसके लिए लंबे समय तक एक आंदोलन चला था, जिसमें कई आंदोलनकारी समय समय पर जेलों में रहे थे या फिर आंदोलन के दौरान कुछ ने अपनी जान गंवाई थी.

इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने एक अवकाश प्राप्त आईएएस अफसर की अगुवाई में एक आयोग बनाए जाने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है. खास बात यह है कि इस आयोग में 'वनांचल' शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा बल्कि इसे आंदोलनकारियों को चिह्नित कर उन्हें योजना का लाभ देने बाबत आयोग का नाम दिया जाएगा. यह आयोग बनने की तारीख से एक साल के भीतर लाभार्थियों को चिह्नित करेगा.

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सीएम सोरेन का ट्वीट.

किसे मिलेगी नौकरी?

सरकारी आदेश के मुताबिक झारखंड आंदोलन के दौरान जिन्होंने अपनी जान गंवाई या फिर जो लोग पुलिस फायरिंग या जेल में बंद किए जाने के दौरान 40 फीसदी से ज़्यादा अपाहिज हुए, उनके आश्रित परिजनों को तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में सरकारी नौकरियां दी जाएंगी, जो कि उनकी योग्यता पर निर्भर करेंगी.

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इस आदेश के मुताबिक सरकार भर्तियों में पांच फीसदी आरक्षण आंदोलनकारियों के आश्रितों के लिए रखेगी. लेकिन यह केवल एक बार ही भर्ती में मान्य होगा. इस योजना का लाभ आंदोलनकारी की पत्नी, पुत्र, अविवाहित पुत्री, विधवा बहू, पति, नाती पोते आदि ले सकेंगे.

किसे मिलेगी पेंशन?

आदेश के मुताबिक सीधे जीवित आंदोलनकारियों को सम्मानित करने के लिए सरकार उन्हें मासिक पेंशन देगी. जिन्होंने 6 महीने से ज़्यादा जेल में काटे थे, उन्हें 7000 रुपये, तीन महीने से कम समय के लिए जेल जाने वालों को 3500 और 3 से 6 महीने तक जेल में रहने वालों को 5000 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाएगी.

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