मदरसों के आधुनिकीकरण पर सरकार का जोर
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मदरसों के आधुनिकीकरण पर सरकार का जोर
झारखंड में 182 मदरसों को सरकार वित्त पोषण करती है

मदरसों में आम तौर पर धार्मिक शिक्षा दी जाती है. यहां से निकलने वाले बच्चे हाफ़िज़, मौलवी, कारी वग़ैरह बनकर खुद को मज़हबी तालीम से जोड़ कर रखते हैं. हालांकी उनके सामने रोज़ी-रोज़गार को लेकर कोई पुख्ता इंतज़ाम नहीं होता है.

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मदरसों में आम तौर पर धार्मिक शिक्षा दी जाती है. यहां से निकलने वाले बच्चे हाफ़िज़, मौलवी, कारी वग़ैरह बनकर खुद को मज़हबी तालीम से जोड़ कर रखते हैं. हालांकी उनके सामने रोज़ी-रोज़गार को लेकर कोई पुख्ता इंतज़ाम नहीं होता है. लिहाजा, झारखंड सरकार ने मदरसों के आधुनिकीकरण पर ज़ोर दिया है. ऐसा इसलिेए ताकि यहां के बच्चे भी आम शहरी की जिंदगी जी सकें.

झारखंड में करीब 15 प्रतिशत मुस्लिम आबादी निवास करती है. तालीम के क्षेत्र में मुसलामनों के पिछड़ेपन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मदरसों के आधुनिकीकरण पर ज़ोर दिया है. हालांकि मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य क्या होगा, इसे लेकर खुद उनके सामने कई सवाल हैं. ये दीगर बात है कि मदरसों के शिक्षकों के पास इस्लामी तालीम और बच्चों के रोज़गार को लेकर अपने ही तर्क हैं.

बता दें कि झारखंड में 182 मदरसों को सरकार वित्त पोषण करती है. राजधानी रांची में दो मदरसे हैं जिसे सरकार आर्थिक सहायता देती है. सरकार का मानना है कि मदरसा शिक्षा को और बेहतर बनाकर यहां के बच्चों को आम प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा सकता है. राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष कमाल खां का कहना है कि सरकार मदरसों में मज़हबी तालीम के साथ-साथ बाकी विषयों की शिक्षा की भी व्यवस्था कर रही है.
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