बड़ी खबर: हाईकोर्ट ने छठी JPSC परीक्षा के रिजल्ट को किया रद्द, 8 हफ्ते में नई मेरिट लिस्ट जारी करने का निर्देश

हाईकोर्ट के इस फैसले से 300 से ज्यादा पास अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है.

हाईकोर्ट के इस फैसले से 300 से ज्यादा पास अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है.

6th JPSC Results Canceled: हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जेपीएससी ने नियमों के अनुसार मेरिट लिस्ट जारी नहीं की. नियमों के खिलाफ तैयार मेरिट लिस्ट को वैध नहीं माना जा सकता. इसलिए कोर्ट मेरिट लिस्ट को रद्द करती है.

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रांची. झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High court) ने छठी जेपीएससी (6th JPSC) मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मेरिट लिस्ट के आधार पर जारी रिजल्ट को रद्द करने का निर्देश दिया है. इस मामले में हाईकोर्ट में कुल 15 याचिका दायर की गई थी. जिन्हें हाईकोर्ट ने चार श्रेणियों में बांटा. तीन श्रेणी को कोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दिया गया. जबकि चौथी श्रेणी में मिनिमम क्वालिफाइंग अंक के आधार को सही ठहराते हुए जेपीएससी के रिजल्ट को रद्द कर दिया.

हाईकोर्ट ने 8 हफ्ते के भीतर नई मेरिट लिस्ट के आधार पर रिजल्ट जारी करने का निर्देश जेपीएससी को दिया है. इस फैसले से पूर्व में चयनित 329 उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटक गया है. इस मामले में प्रार्थी सुमित कुमार महतो और दूसरे याचिकाकर्ता की अपील पर हाईकोर्ट ने सोमवार को यह फैसला सुनाया.

बता दें कि छठी जेपीएसपी परीक्षा के अंतिम परिणाम को चुनौती देते हुए 15 याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गई थीं. किसी ने मेरिट लिस्ट में गड़बड़ी, तो किसी ने आरक्षण के नियमों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया था. किसी में उम्र सीमा में निर्धारण को चुनौती दी गई थी. अदालत ने इनमें से मेरिट लिस्ट में गड़बड़ी को सही माना.

329 अभ्यर्थी हुए थे सफल 
इन याचिकाओं पर तीन से 17 फरवरी तक सुनवाई हुई. 17 फरवरी को अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. सोमवार को जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने परिणाम रद्द करने का आदेश सुनाया. जेपीएससी ने पिछले साल 23 अप्रैल को 329 अभ्यर्थियों को सफल घोषित करते हुए मेरिट लिस्ट सरकार को भेजी थी.

नियमों के विरुद्ध तैयार हुई है मेरिट लिस्ट- कोर्ट

जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जेपीएससी ने नियमों के अनुसार मेरिट लिस्ट जारी नहीं की. मेरिट लिस्ट तैयार करने में क्वालिफाइंग मार्क्स को भी जोड़ दिया गया है, जबकि जेपीएससी के नियमों में क्वालिफाइंग मार्क्स जोड़ने का प्रावधान नहीं है. नियमों के खिलाफ तैयार मेरिट लिस्ट को वैध नहीं माना जा सकता. इस कारण अदालत इसे अवैध मानती है. और इस मेरिट लिस्ट को रद्द करती है.



अदालत ने जेपीएससी को बिना क्वालीफाइंग मार्क्स को जोड़े हुए नई मेरिट लिस्ट आठ सप्ताह में तैयार कर सरकार के पास फिर से अनुशंसा के लिए भेजने का निर्देश दिया. सरकार को नई मेरिट लिस्ट मिलने के चार सप्ताह के अंदर फिर से कैडर का आवंटन करने का निर्देश गया दिया.

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