झारखंड हाईकोर्ट ने नियोजन नीति-2016 को बताया असंवैधानिक, शेड्यूल एरिया में हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति रद्द

झारखंड हाईकोर्ट ने नियोजन नीति 2016 को असंवैधानिक बताते हुए राज्य सरकार को जोरदार झटका है.
झारखंड हाईकोर्ट ने नियोजन नीति 2016 को असंवैधानिक बताते हुए राज्य सरकार को जोरदार झटका है.

झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने नियोजन नीति-2016 को असंवैधानिक करार देते हुए शेड्यूल एरिया में हुई हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति को रद्द कर दिया है.

  • Share this:
रांची. झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने रघुवर सरकार की नियोजन नीति-2016 को असंवैधानिक करार देते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया. हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति परीक्षा में नियोजन नीति के खिलाफ सोनी कुमारी द्वारा दायर याचिका पर हाईकोर्ट की लार्जर बेंच ने फैसला सुनाते हुए नियोजन नीति के अनुसार शेड्यूल एरिया में हुई नियुक्ति को रद्द कर दिया है. और नये सिरे से विज्ञापन निकालकर सभी को परीक्षा में शामिल होने का मौका देने को कहा है. जस्टिस एचसी मिश्रा के नेतृत्व में तीन जजों ने यह फैसला सुनाया.

इससे पहले हाईकोर्ट के लार्जर बेंच ने सभी पक्षों को सुनने के बाद 21 अगस्त को सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था. सोनी कुमारी बनाम स्टेट ऑफ झारखंड के इस मामले में प्रार्थी की ओर से कोर्ट में हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति में राज्य के 13 जिले में स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित करने के खिलाफ याचिका दाखिल कर इसे संविधान के प्रावधानों के विरुद्ध बताते हुए न्याय की गुहार लगाई थी.

प्रार्थी के मुताबिक राज्य के 13 शेड्यूल जिलों में वहां के स्थानीय लोगों के लिए सीटें आरक्षित कर शत प्रतिशत आरक्षण दिया गया, जबकि 11 जिलों को गैर आरक्षित रखा गया, जहां के लिए कोई भी आवेदन कर सकता था.



वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनाये गये इस फैसले पर प्रार्थी सोनी कुमारी ने कहा कि हाईकोर्ट के इस फैसले से उन्हें आंशिक संतुष्टि मिली है, क्योंकि एक ही नियोजन नीति के अनुसार निकाले गये एक विज्ञापन में 11 जिलों में नियुक्ति को जायज कैसे मान सकते हैं, जब नियोजन नीति ही निरस्त कर दी गई हो.
दरअसल वर्ष 2016 में 18584 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया था. इसमें 13 जिलों को स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित कर दिया गया और अन्य 11 जिलों को गैर आरक्षित रखा गया. जिसमें सभी को आवेदन करने का प्रावधान था. सरकार के इस कदम के खिलाफ सोनी कुमारी एवं अन्य ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और 13 जिलों को आरक्षित करने के फैसले को चुनौती दी थी.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज