कोरोना सैंपल जांच में देरी पर झारखंड HC की रांची सिविल सर्जन को फटकार, कहा- काम नहीं कर पा रहे तो दे दें इस्तीफा

कोरोना सैंपल जांच में देरी पर झारखंड हाईकोर्ट ने रांची सिविल सर्जन को जमकर फटकार लगाई.

कोरोना सैंपल जांच में देरी पर झारखंड हाईकोर्ट ने रांची सिविल सर्जन को जमकर फटकार लगाई.

झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High court) ने सैंपल जांच में लेटलतीफी पर रांची सिविल सर्जन को जमकर फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि अगर आप काम नहीं कर पा रहे हैं तो इस्तीफा क्यों नहीं दे देते.

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रांची. राजधानी रांची में कोरोना (Corona) की बिगड़ती स्थिति को लेकर सरकारी अस्पतालों में सैंपल जांच और रिम्स (RIMS) की तैयारियों पर झारखंड हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख दिखाया है. शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट (Jharkhand High court) ने रांची सिविल सर्जन को जमकर फटकार लगाई और स्वास्थ्य सचिव और रिम्स निदेशक को स्वास्थ्य व्यवस्था जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए.

हाईकोर्ट ने सैंपल को कई दिनों तक बिना जांच के रखे जाने और लेटलतीफी पर सिविल सर्जन को कहा कि अगर आप काम नहीं कर पा रहे हैं तो इस्तीफा क्यों नहीं दे देते. मामले में एक याचिकाकर्ता एवं अधिवक्ता राजीव कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी शर्म धोकर पी गये हैं. साथ ही बिगड़ते हालात में मानवता को मारने का पूरा इंतजाम भी कर लिया गया है.

रिम्स में सिटी स्कैन समेत दूसरी मशीन की खरीद मामले पर सुनवाई चल रही थी. इसी बीच कोर्ट ने रिम्स में कितनी सैंपल जांच हो रही है, इससे संबधित जानकारी मांगी. जिसके बाद रिम्स की ओर से कहा गया कि सदर अस्पताल से सैंपल जांच कम ही आ पा रहे हैं. जिसके बाद सिविल सर्जन से जानकारी मांगी गयी.

दरअसल हाईकोर्ट से जुड़े कुछ लोगों के भी सैंपल जांच 5 अप्रैल को लिए गये थे. जिनकी जांच रिपोर्ट अबतक नहीं दी गयी है. इसपर हाईकोर्ट ने पूछा कि सैंपल को बिना जांच के रखकर सड़ाया क्यों जा रहा है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सिविल सर्जन के भीतर इंसानियत की भावना खत्म हो गयी है.
वहीं इस मामले के इंटरवेनर और झारखंड स्टेट बार कौंसिल के अध्यक्ष राजेंद्र कृष्ण ने जानकारी देते हुए कहा कि सदर अस्पताल से बहुत कम ही सैंपल रिम्स को भेजा जा रहा है.

दरअसल सदर अस्पताल से सैंपल को जांच के लिए रिम्स न भेजकर निजी लैब थायोकेयर को भेजा जा रहा है. जिसपर हाईकोर्ट ने सख्त एतराज करते हुए कहा कि सैंपल जांच में भी गोरखधंधा चल रहा है. कोर्ट ने कहा कि जिस रफ्तार से संक्रमण की संख्या बढ़ रही है. उस लिहाजा से रिम्स को भी अपनी तैयारियां मुकम्मल रखनी चाहिए. रिम्स निदेशक को निर्देश दिया गया है कि जांच को लेकर जितनी भी उपकरण की जरूरत है. उसे जल्द से जल्द खरीदा जाए. ताकि मरीजों को पूरी सुविधा मिल सके.

मामले की अगली सुनवाई अब सोमवार को होगी. जिसमें स्वास्थ्य सचिव, रिम्स निदेशक और सिविल सर्जन सभी अधिकारियों को वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ने का निर्देश दिया गया है. हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य से जुड़े तमाम अधिकारियों से काम की रफ्तार तेज करने का निर्देश दिया है. ताकि सरकारी संसाधनों का लाभ आम मरीजों को मिल सके.
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